मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए 04 आदतें

में अपने मानसिक स्वास्थ्य की पहले से कहीं अधिक रक्षा करने की आवश्यकता है। 2020 का हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर व्यापक प्रभाव पड़ा है। इसने कई तरीकों से हमें आँका है, अकेले अलग-थलग घर में बंद रहने से लेकर फिर से बाहर कदम रखने तक का डर को। 


हमें केवल कुछ आंकड़ों को देखने की जरूरत है ताकि यह समझा जा सके कि महामारी का हमारी मनोदशा, चिंता और हमारे अकेलेपन, सामाजिक अलगाव की भावनाओं पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है।


लोगों द्वारा अक्सर मुझसे मेरी मनोवैज्ञानिक आदतों के बारे में पूछा जाता है। असल में इस प्रश्न का उत्तर यह नहीं है कि जब चीजें गलत हों तो उनका कैसे सामना करें? बल्कि यह इन खामियों को होने से रोकने में मदद करने के लिए आदतों का अभ्यास और विकसित करने के सोचने के बारे में है। वास्तव में ये खामियां तो होंगी ही, यही वास्तविकता है।


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लेकिन, अगर हमें अपने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए मजबूत आदतें विकसित करनी हैं, तो हमें लचीलापन, भावनात्मक और नए वैचारिक बुद्धिमत्ता का निर्माण करना होगा, यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य में इन खामियों को कम करने में मदद कर सकता है। 


इसलिए, आज मैं आपके मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए में 04 अलग-अलग आदतों को आपके साथ साझा करने जा रहा हूं-


    आत्मकरुणा को आदत बनाए (Make self compassion a habit)-

    वास्तव में यह आदत मुझे हमेशा ही आश्चर्यचकित करती है कि हम अपने परिवार और दोस्तों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं? उनकी देखरेख या परवाह कैसे करते हैं? या फिर उनके प्रति हमारा स्वभाविक रवैया कैसा है? इसी के साथ हम खुद के प्रति कैसा व्यवहारिक रवैया अपनाते हैं?


    खुद के अनुभव से मैं समझता हूं कि कभी-कभी हम खुद के प्रति अक्सर आलोचनात्मक और कठोर होते हैं, हमेशा हम खुद से अधिक उम्मीद करते हैं क्योंकि हम खुद को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे होते हैं। 

    पर देखा जाये तो यह हमारी गलती नहीं बल्कि जरूरत है क्योंकि आज हम "एक ऐसे समाज में रहते हैं जो बड़ी और महान सफलताओं की मांग करता है" जिस कारण हम अपने आपको कठोर बनाने के लिए मजबूर हैं।


    लेकिन, हमारी चाही गई सफलता हमें प्राप्त न होने पर, इस कठोरपन के काफी हानिकारक और खतरनाक परिणाम हो सकते हैं। कई अध्ययनों में आत्म-आलोचना के नकारात्मक प्रभावों को पाया गया है, जिसमें मुख्य रूप से है "औरों के प्रति ईर्ष्या का भाव रखना और स्वार्थी होना"


    हमें अपने स्वयं के विचारों और भावनाओं का आंकलन करने की आवश्यकता है, यह जान लीजिये कि हम सभी इन कठिन क्षणों का अनुभव करते हैं और हमें कठिन समय में खुद का अवलोकन करने और उस अवलोकन को समझने की आवश्यकता है। 


    आत्म-करुणा के तीन महत्वपूर्ण घटक हैं- मानसिकता, सामान्य मानवता और आत्म-दयालुता। ऐसे कई तरीके हैं जिनसे हम खुद पर दया और सहानुभूति प्रकट कर सकते हैं:

    1. अपने आपसे ऐसे बात करें जैसे आप अपने दोस्त से कर रहें हों। यह आपके सशक्त और सौम्य दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करेगा क्योंकि हम अक्सर अपने सवालों और कठिनाईओं की अपेक्षा दूसरों की कठिनाइयों और प्रश्नों का जवाब आसानी से दे देते हैं।
    2. इस चीज को स्वीकार करें कि हम जो भी गलतियाँ करते हैं, वे हमें संघर्ष के बजाय आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती हैं क्योंकि यही गलतियां हमें बताती हैं कि हम अपने लक्ष्य को पाने के लिये कहां पर चूक कर रहे हैं. हमें अपनी उन कमजोरियों को पहचान कर दूर करने की आवश्यकता है।

    प्रेरणा देने वाले या मोटिवेशनल शब्दों और वाक्यों के साथ अपने भीतर के आलोचक को चुनौती दें। जैसे एक नकारात्मक  वाक्य, "मुझे कुछ भी सही नहीं मिल सकता है। मैं किसी काम का नहीं!" सकारात्मक वाक्य बन जाता है


    "मैं कोशिश कर रहा हूं और मुझे पता है कि मैं यह कर सकता हूं। मैं इससे उबरने के लिए अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल कर रहा हूं।


    अपने आपको और अपने अवचेतन मन को सन्देश दें और बताएं कि ये कठिनाइयां मामूली और कामन हैं और आप अपने अनुभव से इनको आसानी से हल कर लेंगे। देखिये! "दुख तो जीवन का एक हिस्सा है" 

    और हम सभी अपने जीवन में इसको जरूर महसूस करते हैं साथ ही मजबूती से इससे संघर्ष भी करते हैं, साधारण शब्दों में कहें तो करुणा जो हम दूसरों के प्रति दिखाते हैं वही हमें खुद के प्रति भी दिखानी चाहिए.


    दैनिक दिनचर्या के बारे में अधिक जागरूक रहें-

    हममें से ज्यादातर लोग यह महसूस किए बिना अपना दिन गुजार देते हैं कि हम आज क्या करने वाले हैं? हम सुबह उठते हैं, दिन के दौरान हमें क्या करना है? कुछ नया करना है या नई चीजों के बारे में सीखना है


    इससे पहले कि कोई नया कदम उठाएं दिन का अंत हो जाता है और हमारा पूरा दिन बस सोच में ही निकल जाता है, जबकि हममें से कुछ लोगों को अगले दिन यह भी याद नहीं रहता कि उन्होंने पिछले दिन में किस चीज के बारे में सोचा था।

    अपने दिन के प्रति सतर्क होना एक मानसिक स्वास्थ्य आदत है जो कि बेहद  महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमें अपने बारे में अधिक जागरूक होने के लिए सक्षम और कभी-कभी सर्वोत्तम भी बनाती है. हमारी स्वयं की अवधारणाएं, भावनाएं और यहां तक ​​कि हमारी शारीरिक प्रतिक्रियाएं भी हमें प्रतिदिन प्रभावित करती हैं।


    यह चीजें हमें खुद का विश्लेषण करने में बहुत मदद करती है, जैसे कि हमने एक दिन में किन चीजों को विशेष रूप से पूरा किया है, और उन चीजों ने कैसे हमें प्रभावित किया? यदि हम इन कारकों के बारे में ठीक से जानते हैं, तो यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा करने में एक लंबा रास्ता तय कर सकता है।

    अपने दिन के बारे में अधिक जागरूक बनने में मदद करने के लिए यहां कुछ चीजें दी गई हैं:

    1. रात में सोने से पहले अपने अगले दिन की योजना को एक कागज़ पर लिख लें और सुबह उठने के बाद सबसे पहले उस योजना को फिर से देखें। इससे होगा ये कि आप जानते रहेंगे कि अपने लक्ष्य को पाने के लिए आपने प्रत्येक दिन अपना कितना योगदान दिया?
    2. दिन के अंत में तनाव से बचने के लिए ध्यान और योग करें। इससे आपको अपने विचारों, भावनाओं और स्वयं के व्यवहारों को प्रतिबिंबित करने में मदद मिलेगी। इसे एक आदत बनाकर, आप और अधिक दिमागदार (बुद्धिमान) बन सकते हैं क्योंकि आप अपने दिन, आपके द्वारा की गई चीजों के बारे में अधिक सोचने लगते हैं और इससे आप और भी प्रभावित होते हैं।
    3. कोशिश करें हर दिन अपने लक्ष्य को पाने के लिए कम से कम उसकी एक चीज या पहलू को जरूर हासिल करें। जैसे- चाहे वह आपकी पुस्तक के एक पठन पृष्ठ हो, या अन्य कुछ जैसे व्यायाम करना हो, यह आपको आपके लक्ष्य की ओर केंद्रित करेगा क्योंकि किसी भी जगह में आप कैसे फिट होंगे? इसकी जानकारी आपको ऐसा करने से मिलेगी। साधारण शब्दों में "पग-पग बढ़कर अपने लक्ष्य को कैसे पाना है?" यह इसके बारे में है।
    4. काम के बीच में छोटे-छोटे गैप लें- अपने काम को निरंतर ठीक ढंग से करने के लिए आपको अपने काम के बीच-बीच में कई बार छोटे-छोटे 5 से 10 मिनट का गैप या ब्रेक लेना बेहद जरूरी है क्योंकि असल में जब आप ऐसा करते हैं तो यह आपको स्वत: उस काम की सोची गई प्रकृति से दूर कर देगा, जिससे आपमें उस काम के प्रति एक नया दृष्टिकोण विकसित होने की संभावना बढ़ जाएगी जो  आपको कुछ अलग करने और जल्द सफल होने में मदद करेगी।

    सुरक्षात्मक कारक-

    सबसे महत्वपूर्ण और उपयोगी आदतों में से एक, जिसने न केवल मेरे मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा की है, बल्कि जिन लोगों के साथ मैं समय व्यतीत करता हूं, उनकी भी की है। सुरक्षात्मक कारक क्या हैं? और कैसे प्रभावित करता हैं? 

    "सुरक्षात्मक कारक, किसी व्यक्ति की स्वभाविक विशेषता, व्यवहार या दृष्टिकोण है जो तनावपूर्ण जीवन की घटनाओं के प्रभाव को कम कर सकता है।"


    हर एक व्यक्ति के सुरक्षात्मक कारक अलग-अलग होते हैं। उदाहरण के लिए, मेरे दादा मेरे लिए एक बड़े पैमाने पर सुरक्षात्मक कारक है। वे जो सहायता प्रदान करते हैं, वह कोई और नहीं प्रदान कर सकता, मेरे पिता भी नहीं। 

    मुझे यह भी पता है कि जब मैं असहाय या कमजोर(पैसों से) महसूस करता हूं तो मैं बे-झिझक उनसे मदद मांग सकता हूं।


    मनोविज्ञान के कई शोधों से पता चला है कि एक रिश्ते में लचीलापन होना मानसिक स्वास्थ्य कठिनाइयों के खिलाफ बड़ा सुरक्षात्मक कारक हैं। यहाँ पर लचीलेपन से आशय असमान उम्र के रिश्ते से है. शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि 


    हमें हमारे मानसिक स्वास्थ्य की मदद के लिए हमें ऐसे सुरक्षात्मक कारकों को विकसित करने और उन पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है, जिनसे हम अपने आपत्ति काल में उपयोग कर सकें।


    2021 नए साल की शुरुआत है। इसलिए आप अपने स्वयं के सुरक्षात्मक कारकों के बारे में सोचें। ऐसी कौन सी विशिष्ट विशेषताएं हैं जो आपको लगता है कि आपके पास हैं?, जो आपको लचीला रहने में सक्षम बनाती हैं? इन कारकों की पहचान करने में आपकी मदद करने के लिए आप स्वयं से कुछ प्रश्न पूछें:-

    1. जब आप तनाव महसूस कर रहे हों तो वास्तव में आपकी मदद कौन करता है?
    2. आप रोजाना कौन सी चीजें करते हैं, जो आपको अच्छा महसूस कराती हैं?
    3. यदि आप अभी अपने स्थान से दूर जाने के बारे में सोचते हैं, तो आपको क्या/ कौन सहायता प्रदान कर सकता है?

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    देखिए, इस पर थोड़ा गौर कीजिये और ध्यान से समझिएउदाहरण के लिए, यदि आपकी माता जी आपके लिए एक सुरक्षात्मक कारक है, तो आप उनको यह बार-बार बताएं, उनके लिए कुछ तोहफे खरीदें और जितना हो सके उनके साथ समय बिताएँ। 


    जब आप तनाव महसूस करते हैं तब ही उनके पास न जाएं। उनके साथ जुड़े रहने के लिए हमेशा तत्पर रहें, साप्ताहिक या मासिक रूप में जुड़ाव न रखें ताकि आप उस आदत को विकसित कर सकें, जो आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। 


    यदि आपकी माँ आपको बेहतर महसूस कराती हैं, तो जितना संभव हो सके उतना उनके सहयोग का उपयोग करें।

    यदि आपने अपने इस विशेष गुण (सुरक्षात्मक कारक) के लचीलापन को विकसित कर लिया है, तो अपने आपको मतलब अपने अवचेतन मन को सन्देश दें कि हाँ मेरे पास सुरक्षात्मक कारक है


    यह गुण आपको शक्तिवान बनाएगा. अपने सुरक्षात्मक कारकों को कभी न भूलें। समय-समय पर इसकी शक्ति का उपयोग जरूर करें।


    फीडबैक लेना और प्रदान करना-

    उदाहरण के लिएमान लीजिए यदि आपके पास नौकरी पाने के लिए सिर्फ एक इंटरव्यू था और जिसमें नौकरी आपको नहीं मिलीइसमें थोड़ी कठिनाई पैदा हो सकती है आपके लिएखासकर अगर आपको उन कारणों के बारे में पता ही नहीं होजिनके कारण आप सफल नहीं हुए। 


    लेकिन, यदि आप कारणों को जानते हैं, तो यह आपके दिमाग से बड़ी मात्रा में दिक्कतों से पर्दा को उठा सकता है और आप जानते हैं कि यदि आपके पास मात्र एक ही इंटरव्यू है तो आप उसमें सुधार कैसे करें?


    मैं जो कहना चाह रहा हूं, वह एक अमूल्य मानसिक स्वास्थ्य आदत है, जो लोगों से लिए गए फीडबैक से आपको अलग-अलग चीजों में बेहतर बनाने और प्रभावी काम करने में मदद का सकता है और फीडबैक लेने के कुछ तरीके हैं:-

    1. अपने सहपाठी या उच्च अधिकारी से उस कार्य के बारे में पूछें, जो अभी-अभी देखा आपने है कि उन्होंने उस कार्य को कैसे पाया? और आप उसमें कैसे सुधार कर सकते हैं? दोस्तों या परिवार के किसी सदस्य से पूछें कि उन्हें कैसा लगा कि जब आपने कुछ खबरों पर प्रतिक्रिया दी है।
    2. अपने करीबी दोस्त से पूछें कि वे आपको कैसा महसूस कर रहे हैं? यदि आपके दोस्त को लगता है कि आप इस समय अच्छी तरह से मुकाबला नहीं कर रहे हैं, तो उनके दृष्टिकोण को प्राप्त करना ही फीडबैक के उपयोग करने का एक शानदार तरीका है।
    3. न केवल फीडबैक के लिए पूछना आपके मानसिक स्वास्थ्य की मदद कर सकता है बल्कि फीडबैक प्रदान करना भी एक शक्तिशाली आदत है। इसका मतलब है कि आप कैसा महसूस कर रहे हैं? या आप कैसे मुकाबला कर रहे हैं?, इस बारे में लोगों को फीडबैक प्रदान करें।

    मैं हमेशा इस बात पर चर्चा करने की सलाह देता हूं कि आप कैसा महसूस करते हैं? किसी ऐसे व्यक्ति के साथ अपनी बात कैसे साझा करते हैं जिससे आप सहज महसूस करते हैं। चाहे वह परिवार का सदस्य हो, कोई मित्र या फिर आपका बॉस।

    अपने मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा में मदद करने के लिए साप्ताहिक फीडबैक का उपयोग करना मानसिक स्वास्थ्य के सिद्धांत की एक शानदार आदत है।


    अंतिम विचार-

    यह महत्वपूर्ण है कि हम अपने मानसिक स्वास्थ्य में मदद करने के लिए हमारी आदतों में मजबूत आदतें बनाएं, हमारी खामियों को रोकने के लिए, लेकिन जब हमें कुछ नुकसान होते हैं तो हमें बचाने के लिए मदद कर सकें। 


    पिछला साल 2020 हममें से कई लोगों के लिए बेहद कठिन था और जिसने हमारे मानसिक स्वास्थ्य का बहुत गहराई से परीक्षण किया।


    पोस्ट में दी गई मानसिक स्वास्थ्य के उपाय व आदतों को विकसित करने से तनावपूर्ण घटनाओं से निपटने की हमारी क्षमता में सुधार पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है. साथ ही इन 04रों आदतों पर हमेशा तत्परता से पालन करते रहें-

    • आत्म-करुणा का अभ्यास करें।,
    • अपनी दिनचर्या का ध्यान रखें।,
    • सुरक्षात्मक मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारक को पहचानें और उनका  उपयोग करें और 
    • फीडबैक मांगने और प्रदान करने के लिए उपयोग करें।

    आज की पोस्ट में बस इतना ही, खुश रहें आबाद रहें, और लोगों को अपना सहयोग प्रदान करते रहे. उम्मीद करता हूं कि आपको यह "2021 में मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए 04 आदतें" पोस्ट अच्छी लगी हो, 


    अगर हाँ तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर share करें, और ऐसी ही और बातों को जानने के लिए वेबसाईट को subscribe करें. "पढ़ें, समझें, आजमाएं और फिर अमल में लायें." इसी के साथ यदि कुछ पूछना या कहना चाहते हैं तो comment box में लिखें.

    धन्यवाद!

    जय हिन्द! जय भारत!

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