पृथ्वी से परे जीवन की खोज | Origin of life in universe

भ्यता के शुरुआत में हम इन्सानों को लगता था कि हम बेहद खास हैं। हमारा घर यानी हमारी पृथ्वी ही हमारे ब्रह्मांड का केंद्र है और बाकी सभी ग्रह जैसे- सूर्य, तारे और अन्य ग्रह हमारी पृथ्वी का चक्कर लगाते हैं। लेकिन समय अंतराल में हुए शोधों और खोजों से पता चला कि हम इंसान इस विशाल ब्रह्मांड में रेत के दाने बराबर भी नहीं है।

पृथ्वी से परे जीवन की खोज से पहले हमें ब्रह्मांड में अपने सौरमंडल को गहरे से समझना होगा क्योंकि इस विशाल ब्रह्मांड में हमारे सूर्य की तरह अरबों-खरबों तारे मौजूद हैं, जिनका चक्कर पृथ्वी जैसे ढेर सारे ग्रह लगा रहे हैं, और जहां पर हमारी पृथ्वी की तरह मतलब पृथ्वी से परे किसी भी प्रकार का जीवन भी मौजूद हो सकता है।

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    इस तरह की बातों का पता चलने के बाद से ही हमें यह सवाल सताने लगा है कि क्या इस विशाल ब्रह्मांड में हम अकेले हैं?, हमारी पृथ्वी से परे इस विशाल ब्रह्मांड में क्या दूसरे ग्रहों पर जीवन होनी अभी बाकी है?, यदि किसी गृह पर जीवन मौजूद है तो यह जीवन हमारी पृथ्वी से किस तरह और कितना अलग हो सकता है?, 

    कौन-कौन से ग्रह पर जीवन जीवन संभव हुआ है और क्या किसी ग्रह पर हमारे पृथ्वी की तरह ही एक बुद्धिजीवी जीवन भी मौजूद है या नहीं? और अगर किसी ग्रह पर हम इंसानों की तरह ही एक बुद्धिजीवी सभ्यता मौजूद है तो हम अभी तक उन्हें क्यों ढूंढ नहीं पाए हैं?


    जीवन की उत्पत्ति-

    साथियों! पृथ्वी से परे जीवन की खोज के लिए ऊपर दिए गए सवाल कुछ ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब हमारे वैज्ञानिक दिन-रात ढूंढने में लगे हैं। लेकिन वैज्ञानिकों को इस क्षेत्र में अभी तक कोई बड़ी सफलता नहीं मिली है। पर हम अपनी कल्पनाओं के माध्यम से इन सवालों के जवाब जरूर ढूंढ सकते हैं कि पृथ्वी पर जीवन क्यों जीवन क्यों संभव है या हुआ?

    आप तैयार हैं इस विशाल ब्रह्मांड के एक रोमांचक सफर के लिए, जहां हम अपने इस विशाल ब्रह्मांड का अंतहीन और पृथ्वी के अलावा और किस ग्रह पर जीवन संभव है? की खोज का सफर तय करेंगे और एक-एक करके इन सभी सवालों के जवाब ढूंढने की कोशिश करेंगे। 

    अपने सफर की शुरुआत हमें अपने खुद के ग्रह पृथ्वी से करनी होगी और यह जानना होगा कि आखिर हमारे ग्रह पर जीवन किस तरह से पनपा? और किन-किन कारणों से जीवन यहां संभव हो सका? जब हम अपने ग्रह पृथ्वी की ओर नजरें दौड़ाते हैं तो हमें हमारा ग्रह जीवन से भरपूर ही दिखाई देता है। 

    जहां पर हजारों-लाखों की संख्या में पेड़-पौधों और जीवों की प्रजातियां मौजूद है और साथ ही यहां पर एक बुद्धिजीवी सभ्यता भी मौजूद है। लेकिन किसी ग्रह पर जीवन पनपने के लिए क्या जरूरी है? जो कि हमारे अपने ग्रह पृथ्वी पर मौजूद था और जिस कारण से यहां जीवन की उत्पत्ति हुई। 

    जीवन की उत्पत्ति प्रक्रिया जटिल है और जिसमें एक निश्चित सामग्री के तत्वों की जरूरत होती है। जिस तरह हम अपने भोजन में कई तरह के मसाले एक निश्चित मात्रा में डालकर स्वादिष्ट खाना बनाते हैं, ठीक उसी तरह से जीवन पनपने के लिए सही तरह के तत्वों का एक सही अनुपात की आवश्यकता होती है। 


    जीवन के लिए एक आदर्श स्थिति-

    साधारण शब्दों की भाषा में कहा जाए तो हम अलग-अलग तरह के तत्वों के समायोजन से मिलकर बने हुए हैं यानी हम तत्वों के विशाल भंडार हैं। लेकिन किसी भी ग्रह या पृथ्वी जैसे ग्रह पर जीवन पनपने या पनप पाने के लिए एक आदर्श स्थिति का होना भी बहुत जरूरी है। मुख्य रूप से तीन बुनियादी मूल घटकों की आवश्यकता होती है। 

    पहला मूल घटक-

    जिसमें पहला मूल घटक है ऊर्जा- ऊर्जा जैसे कि सूर्य का प्रकाश और भू-तापीय ऊर्जा। किसी भी ग्रह पर जीवन पनपने के लिए एक सही मात्रा की ऊर्जा की आवश्यकता  होती है। यह ग्रह ना तो अपने तारे से ज्यादा दूर होना चाहिए और ना ही ज्यादा पास। मतलब एक सही मात्रा की ऊर्जा किसी भी ग्रह पर जीवन को पनपने का अवसर दे सकती है। 

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    दूसरा मूल घटक-

    जीवन के लिए दूसरा मूल घटक है भारी तत्व- जैसे कि ऑक्सीजन, कार्बन और सल्फर। किसी भी ग्रह पर जीवन को संभव बनाने के लिए बुनियादी तत्वों और अव्यवों की जरूरत होती है। अगर यह तत्व और अव्यव सही तरीके से एक दूसरे से क्रिया-प्रतिक्रिया करते हैं तो इनकी इस क्रिया-प्रतिक्रिया से जीवन पनपने के लिए जरूरी अणुओं की उत्पत्ति की संभावना बढ़ सकती है।


    तीसरा मूल घटक-

    तीसरा जरूरी मूल घटक है तरल जल/पानी- गैसीय अवस्था में अणु एक-दूसरे से काफी ज्यादा दूरी पर मौजूद होते हैं और बेहद तेज चाल से गति करते हैं। जिस कारण यह एक-दूसरे से सही तरीके से क्रिया-प्रतिक्रिया नहीं कर पाते। 

    वहीं ठोस अवस्था में एकदम स्थिर होते हैं और गति नहीं करते। जिस वजह से यह किसी तरह के अन्य अणुओं को नहीं बना सकते। लेकिन तरल अवस्था में ये अणु एक-दूसरे से समान या ठीक-ठाक दूरी पर मौजूद होते हैं। 

    जिससे यह ना सिर्फ दूसरे अणुओं के साथ क्रिया-प्रतिक्रिया करते हैं अपितु ये अणु एक-दूसरे के साथ जुड़कर बुनियादी जीवन पनपने वाले अणुओं का निर्माण भी कर सकते हैं। तरल जल/पानी जीवन के पनपने के लिये आदर्श तत्व माना जाता है, 

    जहां अणु एक-दूसरे के साथ क्रिया कर बुनियादी जीवन पनपने वाले अणुओं का निर्माण कर सकते हैं और फिर यह जीवन पनपने वाले अणु एक-दूसरे के साथ प्रतिक्रिया कर जीवन के लिए जरूरी जटिल श्रंखला का निर्माण कर सकते हैं। मतलब जीवन के पनपने के लिए तरल जल/पानी बेहद जरूरी तत्व है 

    हम इस विशाल ब्रह्मांड में तरल जल/पानी ऐसे ग्रहों पर पा सकते हैं जो कि अपने तारे के रहने योग्य क्षेत्र में मौजूद हो। जहां ना ज्यादा गर्मी होती हो और ना ही ज्यादा ठंडी। जिसकी वजह से जल/पानी अपने तरल अवस्था में लंबे समय तक बना रहे। 


    पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति-

    आज से लगभग 3.8 बिलियन सालों पहले हमारी पृथ्वी जीवन के पनपने के लिए सबसे उपयुक्त जगहों में से एक थी। जहां जल/पानी अपने तरल अवस्था में लंबे समय के लिए उपलब्ध था। इस समय हमारे पृथ्वी पर तरल जल/पानी के विशाल समुद्र मौजूद थे 

    और इन विशाल समुद्री महासागरों की गहराई में कई दरारें भी मौजूद थीं जहां पृथ्वी के गर्भ से भारी तत्व और ऊर्जा इन महासागरों के सतह के माध्यम से बाहर के वातावरण में आ रहे थे। यहां इन बुनियादी जीवन पनपने वाले अणुओं ने मिलकर जीवन के लिए जरूरी कोशिकाओं का निर्माण किया और हमारे ग्रह पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत हुई

    धीरे-धीरे इन बुनियादी अणुओं की प्रतिक्रिया ने क्रमागत उन्नति का रूप ले लिया, जिसने कई बिलियन सालों के दौरान अपने आपको पूर्ण विकसित कर आज वर्तमान का रूप ले लिया है। वास्तव में पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति कैसे हुई? यह अभी भी एक रहस्य है। 

    लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार किसी भी जगह पर जीवन की उत्पत्ति के लिए मुख्य बुनियादी 03 घटकों की जरूरत होती है, जो है ऊर्जा, कार्बनिक अणु और तरल जल/पानी। पर जितना ज्यादा हम जीवन उत्पत्ति के बारे में खोज कर रहे हैं, यह हमें उतना ही ज्यादा अचंभित और आश्चर्यचकित कर रहा है। 

    खोज के दौरान वैज्ञानिकों को धरती(पृथ्वी) पर सूक्ष्मजीवी जीवन के सबूत खतरनाक ज्वालामुखी, गर्म रेत(रेगिस्तान) और ठंडे पर्वतों एवं प्रलयंकारी गहरे समुद्रों के साथ खाली ब्रह्मांड में भी मिले हैं। जिससे यह पता चलता है कि जीवन खतरनाक से खतरनाक वातावरण में भी संभव है। 

    मतलब ऐसे स्थानों पर भी जीवन पनप सकता है जो कि हमें पहली बार देखने में जीवन पनपने के लिए उपयुक्त ना लगे। अभी तक किए गए वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि हमारी पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति आज से करीब 3.8 बिलियन सालों पहले हुई थी। 

    जब हमारी पृथ्वी बेहद खतरनाक ज्वालामुखीय ग्रह की तरह दिखती थी। लाखों सालों तक हमारी पृथ्वी पर विशालकाय ज्वालामुखी और वातावरणीय तूफानों का तांडव रहा। इस समय हमारी पृथ्वी का वातावरण विशालकाय ज्वालामुखी लावा के महासागरों से भरा हुआ था।

    पर इस खतरनाक वातावरण में भी जीवन ने इस ग्रह पर धीरे-धीरे अपनी जगह और पकड़ बनानी शुरू कर दी थी। जैसे-जैसे समय बीता और हमारी धरती थोड़ी ठंडी हुई, वैसे ही विशाल महासागरों की गहराई में जीवन के अस्तित्व की शुरुआत होने लगी। 

    जिस तरह इस खतरनाक वातावरण में भी हमारी धरती पर जीवन पनपा उससे वैज्ञानिकों को उम्मीद जगी कि इस विशाल ब्रह्मांड में जीवन काफी आम हो सकता है जो कि खतरनाक से खतरनाक माहौल में भी संभव है। 

    धरती पर जीवन की उत्पत्ति के करीब 3.8 बिलियन सालों बाद, केवल कुछ दशकों पहले ही हम इंसानों ने पहली बार इस विशाल ब्रह्मांड में धरती से परे जीवन की खोज शुरू की है। मतलब इस विशाल अंतरिक्ष में जीवन की खोज अभी बस शुरू ही हुई है। 


    बुनियादी तत्वों वाले ग्रहों की खोज-

    अध्ययनों से पता चला है कि जीवन की उत्पत्ति के लिए तरल जल/पानी काफी जरूरी तत्व है। अर्थात जहां तरल जल/पानी मौजूद है, वहां किसी न किसी प्रकार का जीवन होने की सबसे ज्यादा संभावनाएं हैं। 

    ऐसे में पृथ्वी से परे जीवन खोजने का सबसे आसान तरीका यह है कि ऐसे ग्रहों की खोज की जाए, जहां तरल जल/पानी मौजूद हो और हम इंसानों ने केवल कुछ सालों पहले ही ऐसे ग्रहों की खोज शुरू की है। जहां तरल जल/पानी मौजूद हो सकता है। 

    पर कुछ समय की खोज के दौरान ही हमें ऐसे कई ग्रह मिले हैं जो कि अपने तारे के रहने लायक क्षेत्र में मौजूद हैं और जहां जल/पानी लंबे समय तक अपने तरल अवस्था में बना रह सकता है, इनमें से कुछ ग्रह हैं- Kepler 62F, Trappist 1D, Teegarden B और K2 18B

    अध्ययनों से पता चला है कि जीवन के बुनियादी मूल घटक जैसे कि तरल जल/पानी और कार्बनिक अणु, हमारे इस विशाल आकाशगंगा में बड़ी मात्रा में मौजूद है। काफी संभावना है कि आकाशगंगा में बुनियादी मूल घटकों वाले ग्रहों पर किसी न किसी तरह का सामान्य या जटिल जीवन मौजूद हो सकता है। 

    केवल हमारे आकाशगंगा में मौजूद सभी तारों में से करीब ¼ तारों की परिधीय कक्षा में ऐसे पथरीले ग्रह मौजूद हैं जो कि रहने लायक क्षेत्र में हैं और अपने तारे का चक्कर भी लगा रहे हैं। मतलब केवल हमारी आकाशगंगा "Milky Way" में पृथ्वी की तरह करीब 50 बिलियन ग्रह मौजूद हो सकते हैं। 

    लेकिन अगर हम अपने इस विशाल और अंतहीन ब्रह्मांड की बात करें तो यह आंकड़ा बहुत ज्यादा है जिसे गिनने में ही हमको आपको कई बिलियन सालों का समय लग जाएगा। बुनियादी मूल घटकों वाले ग्रहों में से हर ग्रह अपने आपमें खास होगा, जहां पर जीवन की एक अलग कहानी भी मौजूद हो सकती है। 


    ग्रहों और उपग्रहों पर जीवन की खोज-

    बुनियादी मूल घटकों वाले ग्रहों पर जीवन एक अलग ही रूप में पनपा और क्रमानुगत उन्नत हुआ होगा। इन ग्रहों पर जीवन पृथ्वी से काफी अलग भी हो सकता है जो कि अलग तत्वों से बने हुए होंगे और जीवन जीने के लिए हमसे काफी अलग संसाधनों पर निर्भर करते होंगे। 

    लेकिन यह जरूरी नहीं है कि हर ग्रह के रहने लायक क्षेत्र में किसी प्रकार का जीवन मौजूद हो। कई वैज्ञानिक खोजों ने यह स्पष्ट किया है कि कई ऐसे ग्रह मौजूद हो सकते हैं जो कि अपने तारे के रहने लायक क्षेत्र में मौजूद होने के बावजूद किसी कारण वश काफी ठंडे या गर्म हैं 

    या वहां पर ज़हरीली गैसों का प्रवास है। हो सकता है कि इनमें से कुछ ग्रहों पर जीवन के लिए उपयुक्त वातावरण ना हो या इनके ऊर्जा के स्रोत मुख्य तारे बेहद खतरनाक किरण पात और रेडिएशन छोड़ते हो। उदाहरण के तौर पर पहले वैज्ञानिकों का मानना था कि-


    जीवन की खोज पड़ोसी ग्रह शुक्र पर-

    शुक्र ग्रह पर जीवन संभव है या हो सकता है? हमारी पृथ्वी का पड़ोसी ग्रह शुक्र जीवन के लिए काफी उपयुक्त है, जहां तरल जल/पानी और शायद किसी प्रकार का जीवन भी मौजूद हो सकता है। 

    लेकिन जब शुक्र ग्रह का करीबी से अध्ययन किया गया तब पता चला कि इस ग्रह का वातावरण बहुत खतरनाक है जो कई तरह के ज़हरीली गैसों से भरा हुआ है और यहां जीवन के पनपने के लिए कोई संभावना है ही नहीं। लेकिन ऐसा भी जरूरी नहीं है कि जीवन केवल रहने लायक क्षेत्रों में मौजूद ग्रहों पर ही पनप सकता है। 


    बृहस्पति एवं शनि ग्रह के उपग्रहों (चंद्रमा) पर जीवन की खोज-

    तारों की ऊर्जा(गर्मी) पर निर्भर ग्रहों से परे मौजूद अन्य विशाल ग्रहों का चक्कर लगा रहे है उपग्रह (चंद्रमा) भी जीवन के पनपने के लिए काफी उपयुक्त हो सकते हैं। इन्हें जीवन के लिए जरूरी ऊर्जा या ऊष्मा न सिर्फ अपने तारे(सूर्य) की रोशनी से मिलती है बल्कि इनके विशाल ग्रहों का गुरुत्वाकर्षण भी इन्हें काफी ऊर्जा या ऊष्मा मुहैया कराता है।

    उदाहरण के लिए बृहस्पति ग्रह का चक्कर लगा रहे आइ ओ (IO) उपग्रह (चंद्रमा) पर कई विशाल सक्रिय ज्वालामुखी मौजूद है। जिसका कारण है बृहस्पति ग्रह का शक्तिशाली गुरुत्वीय ज्वारीय बल 

    बृहस्पति ग्रह के उपग्रह (चंद्रमा) यूरोपा (Europa) और शनि ग्रह के उपग्रह (चंद्रमा) एन्सेलाडस (Enceladus) पर जीवन के लिए जरूरी सभी 03 बुनियादी मूल घटक तरल जल/पानी, कार्बनिक अणु और ऊर्जा, विशाल मोटी बर्फ की पर्त के नीचे मौजूद उपग्रह की मुख्य सतह पर अवस्थित है।

    ऐसे में काफी संभावना है कि इन उपग्रहों (चंद्रमा) की मुख्य सतह पर मौजूद जल के महासागरों में किसी प्रकार के जीवन की अवस्था मौजूद हो सकती है। 

    वही! शनि ग्रह के उपग्रह (चंद्रमा) टाइटन पर वैज्ञानिकों को तरल हाइड्रोजन और कार्बन के समुद्र और एक उपजाऊ वातावरण भी मिला है। केवल हमारे सौरमंडल में दर्जनभर ऐसे चंद्रमा मौजूद है, जहां किसी प्रकार का जीवन भी मौजूद हो सकता है। 

    मतलब अभी तक आप समझ चुके होंगे कि कैसे किसी ग्रह के चंद्रमा पर जीवन मौजूद हो सकता है? अकेली हमारी आकाशगंगा Milky Way में इस तरह के 100 खरब से भी ज्यादा चंद्रमा मौजूद हो सकते हैं। 

    जो की हमारी आकाशगंगा Milky Way में मौजूद सभी ग्रहों की संख्या से करीब 100 गुना ज्यादा है। इनमें से कुछ चंद्रमा हमारे पृथ्वी जितने विशाल भी हो सकते हैं, जहां हमारी पृथ्वी की तरह का वातावरण मौजूद हो सकता है।

    मतलब हमारे ब्रह्मांड में ऐसी कई जगहें मौजूद हो सकती है, जहां जीवन हो और वह फल-फूल भी रहा है। केवल कुछ समय की बात है जब हम हमारे पृथ्वी से परे किसी ग्रह या उसके उपग्रह (चंद्रमा) पर जीवन की खोज कर लें। 

    वहीं अगर हम हमारे पृथ्वी से परे किसी दूसरी जगह पर जीवाणुओं की खोज भी कर लें तो यह हम इंसानों के लिए काफी बड़ी खोज होगी। जिससे हमें यह पता चल जाएगा कि विशाल अंतहीन ब्रह्मांड में हम अकेले नहीं है बल्कि जीवन हर कहीं अलग-अलग रूप में पनप रहा है। 

    अमेरिकन स्पेस एजेंसी नासा-

    अमेरिकन स्पेस एजेंसी नासा के वैज्ञानिकों का कहना है कि हम हमारे पृथ्वी से परे मौजूद जीवन को ढूंढने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं और कुछ सालों के भीतर ही हम हमारे सौरमंडल के दूसरे ग्रहों या उनके उपग्रहों (चंद्रमा) पर मौजूद जीवन की खोज कर सकते हैं। 

    साथ ही हम दूसरे तारों का चक्कर लगा रहे हैं ऐसे ग्रहों की भी खोज कर सकते हैं जहां पर किसी भी प्रकार का जीवन मौजूद हो सकता है। यह खोज मानव जाति के सबसे अहम पलों में से एक होगी। 

    जब हम यह सोचेंगे कि इस ब्रह्मांड में हम अकेले नहीं है। लेकिन कहानी की बुनियाद तब शुरू होगी जब हम हमारी पृथ्वी से परे मौजूद अलग जीवन की खोज कर लें। 

    लेकिन तब एक नया सवाल हमारे सामने खड़ा होगा कि अगर हमारे ब्रह्मांड में जीवन एक आम बात है जो हर कहीं मौजूद है और फल-फूल रहा है तो हम हमारे ब्रह्मांड में मौजूद जीवन की कड़ी में किस छोर पर मौजूद हैं?

    क्या हमारे पृथ्वी पर जीवन के पनपने से पहले भी कहीं और भी जीवन मौजूद था? या फिर हम हमारे ब्रह्मांड में जीवन की शुरुआत के पहले पात्र तो नहीं? और क्या इस ब्रह्मांड में सबसे पहले हमारी पृथ्वी पर ही जीवन की शुरुआत हुई है?


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    अंत में-

    दोस्तों आज की पोस्ट में बस इतना ही और इन सवालों के जवाबों को हम अगली पोस्ट में बात करेंगे। साथ ही पृथ्वी के अलावा और ग्रह जिस पर जीवन है या भविष्य में संभव हो सकता है इसके बारे में भी संक्षिप्त में चर्चा करेंगे। उम्मीद करता हूँ कि आपको यह पोस्ट "पृथ्वी से परे जीवन की खोज" का पार्ट-1 अच्छा लगा होगा। 

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