मानव स्वभाव एवं व्यक्तित्व विकास के बारे मे रोचक तथ्य

म कई ऐसी बातों को दोहराते हैं जो पहली नज़र में बेतुकी और महत्वहीन सी लगती है। लेकिन मनोविज्ञान के अनुसार "हमारी हर छोटी से छोटी आदत हमारे व्यक्तित्व को परिवर्तित करती है" मतलब असर डालती है और दूसरों को बताती है कि जीवन को जीने और सफल बनाने के लिए हम अपना दृष्टिकोण और नज़रिया किस तरह का अपनाते हैं?


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मानव स्वभाव एवं व्यक्तित्व विकास के बारे मे रोचक तथ्य

आज हम मानव स्वभाव एवं व्यक्तित्व विकास को संवारने के कुछ मजेदार रोचक तथ्यों के बारे में बात करने जा रहे हैं. उम्मीद करते हैं की आपको पसंद आयेगा। चलिये पूरे जोश के साथ शुरू करते हैं-


    संगीत का चुनाव- 

    चूंकि संगीत में हमारे मानसिक अवसादों एवं अस्थायी भावनाओं और स्थायी दृष्टिकोण को सुदृढ़ करने की शक्ति होती है। जब हम दुखी या उदास होते हैं तो हमारी गानों की सूची में अलग तरह के गाने होते हैं मतलब Sad Music ज्यादा पसंद करते हैं। 


    वही जब हम व्यायाम कर रहे होते हैं तो अलग तरह के, यानी कि जोश से भरे गाने सुनते हैं। जिस तरह का संगीत आप सबसे ज्यादा और बार-बार सुनते हो। 

     

    वह दूसरों को आपके दिमाग में चल रही सोच और मानसिकता के साथ आपकी योजनाओं के बारे में बताता है और यह इसलिए क्योंकि हमारे दिमाग पर संगीत का असर बड़े लंबे समय तक रहता है। इसलिए हमें अपने मानव स्वभाव एवं व्यक्तित्व को संवारने के लिए अपने संगीत के चुनाव पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।

     

    एक मनोवैज्ञानिक अध्ययन बताता है कि जो लोग भड़कीले संगीत का चुनाव करते हैं या सुनना पसंद करते हैं, वह दूसरे लोगों से ज्यादा अशांत, बेचैन और नर्वस रहते हैं। पॉप संगीत के श्रोता सामान्यतः बहिर्मुखी होते हैं पर उनमें रचनात्मकता की कमी पाई जाती है। 


    मनोविज्ञान के अनुसार 80% लोग अपने नकारात्मक विचारों को दूर करने के लिए संगीत का सहारा लेते हैं. 

     

    हिप-हॉप या रैप संगीत सुनने और पसंद करने वाले लोगों की चाहत सामान्य लोगों की अपेक्षा विस्मित होती है वह इस तरह के गानों को सुनते हैं आत्मविश्वास से भरा हुआ महसूस करने के लिए। विरह का संगीत सुनने वाले लोग ज्यादा मूडी होते हैं और सिर्फ आवाज रहित इंस्ट्रुमेंटल सुनने वाले लोग बौद्धिक रूप से जिज्ञासु और गहन विचारक होते हैं। 


    कलात्मक नजरिया-

    अपने आप से पूछिए कि जब आप एक सुंदर पेंटिंग को देखते हैं या फिर कविता या उपन्यास पढ़ते हैं तो आपकी सामान्य प्रतिक्रिया या कलात्मक नजरिया क्या होता है? क्या आपको कला(आर्ट) बोरिंग लगती है? या फिर क्या आपके हिसाब से कला(आर्ट) हमारी जिंदगी को एक अलग अर्थ या संभावना देती है क्योंकि जो लोग कलात्मक चीजों को प्रेरित करते हैं। 

     

    वह खुद भी ज्यादा कलात्मक या रचनात्मक, खुले विचारों के साथ रोमांच पसंद करने वाले और जिज्ञासु होते हैं। मानव मनोविज्ञान में इस तरह के लोगों को जिस व्यक्तित्व विकास की शाखा के साथ परिभाषित किया जाता है, उसे बोलते हैं ओपेन-नेस यानी अपने विचारों में खुलापन रखने वाले लोग। 


    साफ-सुथरा और व्यवस्थित रहना-

    आप अपने घर या कमरे, जिसमें आप रहते हो को कितना साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखते हो? क्योंकि जो लोग अपने निवास स्थान जैसे घर या कमरे को हमेशा साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखते हैं। 


    वे अपनी जिंदगी में भी ज्यादा सुव्यवस्थित, मेहनतकश और विश्वसनीय एवं भरोसेमंद होते हैं। जो की अच्छे व्यक्तित्व के गुण को प्रदर्शित करता है।

     

    इसके साथ ही वह अपने जीवन का लक्ष्य और उसकी प्राप्ति के आधार पर अपने आपको परिभाषित करते हैं और यह हमारे मानव स्वभाव के बारे मे बताता है कि इस तरह के लोगों के लिए अतिवादी यानी अपने काम के लिए जुनूनी बनना बहुत आसान और सामान्य होता है और जिसके बाद यह एक पूर्णतावादी भी बन सकते हैं और उससे ये जुनूनी व्यवहार भी दिखा सकते हैं। 

     

    वहीं दूसरी तरफ अगर आपको अपने घर या कमरे को अव्यवस्थित रखने की आदत है तो आप शांत, तनाव मुक्त होने के साथ अनियंत्रित या अस्‍त-व्‍यस्‍त हो सकते हैं। आपको रोज़ाना की दिनचर्या और उसका ढांचा नहीं पसंद और आप नियमों को तोड़ने में हिचकिचाते नहीं। 


    व्यवहारिक शब्द-

    हम शब्दों को किस तरह से उपयोग करते हैं? यह भी हमारे स्वभाव के बारे में बता सकता है। एक मनोवैज्ञानिकों की टीम ने कई सालों तक व्यवहारिक शब्दों जैसे I, This और The का अध्ययन किया और उन्होंने यह पता लगाया कि हम किसी भी इंसान की उम्र, लिंग, बौद्धिक क्षमता और स्वभाव के बारे में जान सकते हैं। 

     

    उनके द्वारा लिखे या बोले गए शब्दों का विश्लेषण करके, जैसे- अगर किसी इंसान का स्वभाव अपने लेखन, जैसे- ईमेल, डायरी आदि या मौखिक बातचीत में I, Me या Myself जैसे शब्दों का प्रयोग करता है तो उसका मतलब वह सच बोल रहा है। 

    वहीं जो लोग झूठ बोल रहे होते हैं वो अपने आपको उस बातचीत या लेखन में खुद का उल्लेख करने से हिचकिचाते हैं और अपने आपको झूठ से जुदा-जुदा करने के लिए वह बार-बार अपने आपका हवाला देना पसंद नहीं करते हैं। 

     

    इसके साथ ही अध्ययन में एक और आश्चर्यजनक बात यह पता लगी कि जिन लोगों में अपने आपको मेंशन (नोटिस) करने की आदत होती है वह अपने आप से ज्यादा ना-खुश या असंतुष्ट रहते हैं और अपने आपकी आलोचना भी ज्यादा करते हैं। 


    इसका मतलब है कि हमारा भाषा को प्रयोग करने का तरीका पूरा बदल जाता है जब हमारी भावनाएं बदल जाते हैं। भाषा का चरित्र निर्माण और व्यक्तित्व विकास में विशेष महत्व होता है। आप भी अपने शब्दों पर गौर कीजिये कौन से शब्द हैं, जिनको आप ज़्यादातर उपयोग में लेते हैं?


    फोन की लत-

    आप अपने फोन के कितने लती हैं? यह बता सकता है कि आप भावनात्मक रूप से कितने स्थिर और मजबूत हैं? हममें से ज्यादातर लोगों को बार-बार अपने फोन को चेक करने की आदत होती है।

    कोई फर्क नहीं पड़ता की हम कही भी खड़े हों, बैठे हों, दोस्तों के साथ हों या फिर कुछ पढ़ रहे हैं। हमारा फोन हमें बीच-बीच में थोड़ा-थोड़ा डोपामिन देखकर हमारी भावनाओं को सुद्रण बनाये रखता है और हमें बोर, उदासीन या कुपित होने से बचाता है। 

     

    एक अध्ययन बताता है कि फोन की लत का सीधा-सीधा संबंध है भावनात्मक स्थिरता मतलब मनोविक्षुब्धता से। यानी अगर आपको हर समय अपना फोन प्रयोग करने की आदत है और आप उसके बिना ज्यादा समय तक नहीं रह सकते। 


    तो कई संभावनाएं हैं कि आप एक मूडी व्यक्ति हों और आप दूसरों से ज्यादा डर, गुस्सा, घबराहट, चिंता, व्याकुलता और अकेलापन महसूस करते हो। आज के परिपेक्ष्य में कई बार मोबाइल फोन के कारण व्यक्तित्व विकास के लिए जटिल समस्या भी उत्पन्न होती दिखाई पड़ती हैं।


    आपकी लिखावट-

    आपकी लिखावट यानी आप किस तरह से अपने अक्षरों और शब्दों को जोड़ते हैं, आपके अक्षर और शब्द कितने बड़े होते हैं? और आपका प्रत्येक अक्षर और शब्द किस तरफ झुके हुए है? आपकी लिखावट से जुड़ी हर छोटी से छोटी आदत आपके व्यक्तित्व और स्वभाव को परिभाषित कर सकती है। 

     

    एक शोध के अनुसार जिन लोगों की लिखावट छोटी होती है। वह ज्यादा शर्मीले और अंतर्मुखी होते हैं, जबकि बड़ी लिखावट वाले लोगों को अन्य लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचना पसंद होता है और वह बहिर्मुखी होते हैं। 


    वहीं अगर आपके अक्षर और शब्द दायीं ओर झुके होते हैं तो उसका मतलब है की आप आवेगशील हैं। बायें तरफ झुके होने का मतलब है कि आप आरक्षित और अकेले रहते हैं तथा सीधे अक्षरों की लिखावट यह इंगित करती है कि आप तार्किक और रचनात्मक, भौतिकवादी हैं। 

     

    साथ ही इस पर भी गौर करें कि आप कितने दबाव के साथ हर अक्षर को लिखते हैं क्योंकि ज्यादा दबाव के साथ लिखने से आपकी लिखावट ज्यादा गहरी और मोटी बन जाएगी जो कि आपकी नोटबुक के पन्नों को खराब कर सकती है। 


    लेकिन गहरी लिखावट एक प्रतीक होता है कि आप अपने वादों पर मजबूती से डटे रहते हैं और चीजों को ज्यादा गहराई लेते हैं, जबकि हल्की दाब की लिखावट वाले लोग ज्यादा संवेदनशील और भावनात्मक होते हैं और उनमें सजीवता और ज़िंदा-दिली की कमी पाई जाती है।

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    अंत में-

    तो ये थे कुछ मानव स्वभाव एवं व्यक्तित्व विकास के बारे मे रोचक तथ्य। ऐसे और भी दिलचस्प बातों और मनोवैज्ञानिक तथ्यों को पढ़ने के लिए वेबसाईट की सदस्यता लें. पोस्ट अच्छी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों और जरूरतमंद लोगों को Share जरूर करें और कोई भी आपका सुझाव है या फिर आप कुछ भी कहना चाहते हैं। प्लीज हमें comment box में जरूर बताएं।

     

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