आकर्षण का सिद्धांत | Law of Attraction in hindi

आकर्षण का सिद्धांत कैसे काम करता है? | Law of Attraction in hindi

19वीं सदी में प्रिंट मीडिया के माध्यम से सबसे पहले आम लोगों के लिए छपे “Mind Over Body” नामक मनोवैज्ञानिक लेख ने हम इन्सानों के दिमाग पर गहरा प्रभाव डाला और यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि "क्या सिर्फ इच्छाओं को Visualize कर अपने लक्ष्य को आकर्षित किया जा सकता है?"

इस लेख के बाद आकर्षण के पक्ष को मनोविज्ञान में विशेष तौर पर ध्यान और अध्ययन किया गया और जो कुछ सामने आया उसे मैं अपनी समझ से आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ।

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आकर्षण का सिद्धांत | Law of Attraction in hindi
आखिर आकर्षण सिद्धांत यानी लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन कैसे काम करता है?, नियम क्या है? मतलब आकर्षण का नियम कैसे काम करता है?, किसी चीज को अपनी ओर आकर्षित करने के उपाय क्या है?

आज हम इसी विषय के बारे में चर्चा करने वाले हैं और आकर्षण का सिद्धांत कैसे काम करता है? जैसे प्रश्नों का जवाब खोजने की कोशिश करेंगे। नमस्कार मित्रों! स्वागत है आपका हमारी वेबसाइट में। चलिये शुरू करते हैं आज के गंभीर विषय को-

    आकर्षण का रहस्य-

    आकर्षण का सिद्धांत कैसे काम करता है? या आकर्षण के नियम को समझने के लिए सबसे पहले हमें आकर्षण के रहस्य (the secret law of attraction) को समझना होगा।
    देखिये! हम अपने जीवन में अपने विचारों और उन विचारों के कर्मों से अपनी ओर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों चीजों को आकर्षित कर सकते हैं। आकर्षण का सिद्धांत (Law of Attraction) इस बात पर निर्भर करता है कि "इस ब्रह्मांड की हर एक चीज ऊर्जा है एवं ऊर्जा से ही निर्मित है",

    अत: जैसी ऊर्जा आप इस ब्रह्मांड में छोड़ेंगे, वैसी ही ऊर्जा वापस आपके पास लौटेगी। अगर ब्रह्मांडीय ऊर्जा से इच्छाओं को पूरा करने के लिए आप आकर्षण के नियमों की मदद लेना चाहते हैं, 

    तो सबसे पहले आपको अपनी मानसिकता, अपनी सोच को सकारात्मक बनाना होगा साथ ही अपने सकारात्मक विचारों के साथ अपने लक्ष्यों के लिए मेहनत करना शुरू करना होगा और इसी के साथ अपने लक्ष्यों को पाने में आने वाली कठिनाइयों का सामना करते हुए अपने लक्ष्य की ओर अग्रेसर होना होगा।

    इच्छाओं को कागज पर लिखना-

    जब हम अपनी इच्छाओं को कागज पर लिखते हैं तब क्या होता है? यह तथ्यात्मक प्रश्न दुनिया में आकर्षण के सबसे बड़े रहस्यों में से एक है जो हमारे सपनों और इच्छाओं को पूरा करने की क्षमता रखता है। दुनिया में बहुत ही कम लोग हैं

    जो इसके बारे में जानते हैं क्या आप भी इस प्रश्न के उत्तर के बारे में जानना चाहेंगे? अपनी इच्छा के उस क्षण के विचार को कागज पर लिखें, जिसे लेकर आप बेहद गंभीर हैं। एक इंसान का दिमाग औसतन दिन भर बहुत सारी इच्छाओं और सपनों के बारे में सोचता है।

    लेकिन जिस इच्छा या सपने को पूरा करने के लिए आप कुछ भी करने के लिए तैयार हों, उसी इच्छा को आप एक कागज पर लिख डालिए। 

    जब आप ऐसा करेंगे तो आपके दिमाग को एक सकारात्मक मजबूत संदेश जाएगा, जिससे दिमाग को लगेगा कि वो चीज जिसे आपने कागज पर लिखा है वह आपके लिए बेहद खास है और आप उसके लिए बहुत गंभीर हैं यानी कि जिस चीज को पाने के लिए आप गंभीर हुए हैं,

    उसी चीज को पाने के लिए आपको आपका दिमाग ऊर्जा और ताकत देना शुरू कर देगा। मतलब कागज पर इच्छाओं को लिखने से आपका तार्किक दिमाग भी उस इच्छा पर प्रतिक्रिया करेगा और उसे गंभीरता से लेने लगेगा। जैसे- लिखित परीक्षाओं को आपका तार्किक दिमाग गंभीरता से लेता है। क्योंकि....

    "लिखने की प्रक्रिया एक Active Activity है,

    जबकि सुनने और देखने की प्रक्रिया Passive Activity"

    लिखने की प्रक्रिया का हमारे तार्किक दिमाग पर एक मानसिक एवं मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है, जिससे हमारा दिमाग अपने आप हमें अंदर से इतनी ऊर्जा, शक्ति और प्रेरणा देता या देने लगता है जिससे हम अपनी उस इच्छा या लक्ष्य को जल्द से जल्द पूरा कर लें और अपने जीवन को सुखी व खुशहाल बना पाएं। 

    लेकिन दिमाग की इस शक्ति को पाने के लिए आपको अपना एक लक्ष्य निर्धारित करना बेहद जरूरी है। जैसे- किसी भी परीक्षा को पास करना हो, कोई मनचाही नौकरी पानी हो या फिर नौकरी में वांछित प्रमोशन पाना हो। आपको अपना लक्ष्य तो रखना ही चाहिए।

    इच्छाओं को कागज पर लिखना तो बाद की बात है। पहले आप अपने लक्ष्य के प्रति स्पष्ट हों कि आपको असल में चाहिए क्या? अपने लक्ष्य को निर्धारित करने के लिए आपको अकेले रहने का प्रयास करना चाहिए और अपने विचारों का मंथन करना चाहिए.

    "नेपोलियन हिल" जो एक बहुत बड़े अमेरिकन लेखक हैं। उन्होंने भी यह बताया है कि जो लोग अपना लक्ष्य निर्धारित करते हैं यानी कि उन्हें क्या चाहिए? इसके बारे में वह एकदम स्पष्ट हैं कि हां! मुझे यह चाहिए, मेरी यह इच्छा है

    जिनका लक्ष्य एकदम स्पष्ट और निर्धारित होता है, वे अपनी जिंदगी में अपने उस लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर ही लेते हैं। वहीं दूसरी तरफ जिन लोगों को अपने जीवन में यह पता ही नहीं होता कि उन्हें अपनी जिंदगी में क्या करना है?

    जो मात्र निरर्थक जिए जा रहे हैं, वे लोग अपनी जिंदगी में जैसे हैं, वैसे ही रह जाते हैं और समय बीत जाने के बाद पछतावे का मातम मनाते हैं। इस बात की, कई सारे शोधों और खोजों से पुष्टि की जा चुकी है।

    वैज्ञानिक अनुसंधान-

    एक वैज्ञानिक अनुसंधान बताता है कि आपको अपने लक्ष्य की इच्छा को कागज पर क्यों लिखना चाहिए? यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफ़ोर्निया के एक मनोवैज्ञानिक प्रोफेसर जिनका नाम डोमिनिकन है।

    उन्होंने लक्ष्य प्राप्ति की इच्छा को कागज पर लिखने से सम्बन्धित काफी शोध और अध्ययन किया है। अपने अध्ययन-गत परीक्षण में उन्होंने लगभग 267 व्यक्तियों को लिया,

    जिसमें उन्होंने हर प्रकार के लोगों के साथ यूनिवर्सिटी के छात्रों एवं स्नातकों के दोनों वर्गों बालक और बालिकाओं को लिया और इन 267 व्यक्तियों को अलग-अलग दो दलों में बांट दिया-

    1.      एक वो जो अपनी इच्छाओं को कागज पर लिखते थे। और 

    2.     दूसरे वे जो अपनी इच्छाओं को बस दिमाग में सोचकर रखते थे। 

    पहले दल के लोगों को यह कहा गया कि आपकी जो इच्छा है उसे एक कागज लिखकर उस कागज को हमेशा अपने सामने रखना ताकि रोज कम से कम एक बार आपकी नजर उस पर पड़े। जिससे आपकी इच्छा और उसका लक्ष्य आपको हमेशा याद रहे। 

    वहीं जो दूसरे दल के लोगों से कहा गया कि "आप अपनी इच्छा और उसके लक्ष्य को सिर्फ दिमाग में ही याद रखना है।" प्रोफ़ेसर डोमिनिकन के इस अनुसंधान के बाद यह परिणाम निकला कि जो लोग अपनी इच्छा और उसके लक्ष्य को कागज पर लिखते थे उन लोगों ने अपनी ज़्यादातर इच्छाओं के लक्ष्य को अच्छे से पूरा कर लिया और वह भी बहुत कम समय में

    लेकिन वहीं दूसरे दल के लोग जो अपनी इच्छाओं और उसके लक्ष्य को कागज पर नहीं लिखते थे उनमें से ज्यादातर लोगों के जीवन में कोई विशेष बदलाव नहीं आया था मतलब वो जैसे पहले थे, वैसे ही रह गए, मात्र एक या दो लोग ही अपना लक्ष्य पूरा कर पाए। अनुसंधान के अंतिम में स्पष्ट वैज्ञानिक परिणाम यह निकला कि-

    "जब आप अपनी किसी इच्छा को पूरा करने के लिए गंभीर होकर अपनी उस इच्छा के लक्ष्य को एक कागज पर पूरे भाव से लिखते हैं तो आपकी इच्छा पूर्ण होने के मौके 42% से 49% तक बढ़ जाते हैं।"

    लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन कैसे काम करता है? इसको समझने के लिए आपको विज्ञान और आध्यात्मिक पक्ष दोनों को समझने की जरूरत है-

    1.      विज्ञान कहता है- "ऊर्जा ही ऊर्जा को आकर्षित करती है।" जबकि… 

    2.     आध्यात्म के अनुसार- "आपके विचार ही आपका लक्ष्य निर्धारित करते हैं।"

    मतलब आपकी जो इच्छा है उसको रोज Visualize करना, अपनी कल्पना को यथार्थ में जीना और यह मानना कि जो आपकी इच्छा थी वह पूरी हो रही है या चुकी है और आप उस इच्छा का अपने वर्तमान भौतिक जिंदगी में लुफ्त उठा रहे हैं।

    असल में आकर्षण का नियम हमारे दिमाग की एक शक्ति है जो हमारी इच्छाओं को पूरा करने के लिए काम करती है। और दिमाग की इस शक्ति को उजागर तथा उन्नत बनाने के लिए हमें आकर्षित करने के उपाय और कारणों को गहराई से समझना होगा।

    विचारों की अभिव्यक्ति (Manifestation of Thoughts)-

    विचारों की अभिव्यक्ति (Manifestation of Thoughts) चीजों को अपनी ओर आकर्षित करने की एक ऐसी तकनीक है जिसमें हम अपने विचारों के माध्यम से अपनी इच्छाओं और लक्ष्यों की कल्पना करते हैं और हमारे द्वारा की गई कल्पना भविष्य में धीरे-धीरे साकार होने लगती है। 

    हमारा दिमाग एक कोरे कागज की तरह होता है। हम अपनी कल्पना की ताकत से अपने सकारात्मक विचार और इच्छाओं को अपने दिमाग के अवचेतन मन को  संदेश भेजते हैं।


    हमारी कल्पना शक्ति जितनी ठोस और मजबूत होगी उतनी ही जल्दी हमारा संदेश हमारे अवचेतन मन/दिमाग तक पहुंचेगा। एक बार संदेश पहुंचने के बाद हमारा दिमाग हमारी उस इच्छा को पूरा करने में लग जाएगा

    और हमें अपनी इच्छा पूर्ति के नए-नए मार्ग, तरीके और संकेत दिखाना शुरू कर देगा। लेकिन अवचेतन मन/दिमाग तक अपनी इच्छा पहुंचाने के लिए हमें अपनी कल्पना शक्ति को ठोस, मजबूत, उन्नत विचारों से युक्त भावनात्मक बनाना बेहद जरूरी है।

    महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने भी इस संबंध में कहा है कि “If you can Imagine that you can Do” मतलब "यदि आप कल्पना कर सकते हैं तो आप उसे असल में भी कर सकते हैं

    वैज्ञानिक दृष्टि से-

    वैज्ञानिक दृष्टि से बात करें तो जब हम किसी इच्छा या लक्ष्य को अपने दिमाग में ही रखते हैं। जैसे कि मुझे उच्च स्तर की परीक्षा पास करनी है या फिर मुझे वह नौकरी करनी या पानी है।

    जब हमारे दिमाग में इस तरह की इच्छाएं आती हैं तब हम हमारे दिमाग का दायां हिस्सा यानी Right Hemisphere ही काम करता है। क्योंकि हमारे दिमाग का केवल दायां हिस्सा Left Hemisphere ही कल्पनाशील होता है।

    इसलिए जब हम अपने सपने के बारे में सोचते हैं तब हम हमारे दिमाग का दायें हिस्से यानी Right Hemisphere को सक्रिय करते हैं। 

    लेकिन मूल बात यह है कि हम अपनी इच्छाओं को तभी पूरा कर पाएंगे, हमें हमारा दिमाग अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए ऊर्जा और प्रेरणा तभी देगा।

    जब हम अपने दिमाग के दोनों हिस्सों का इस्तेमाल करेंगे, मतलब दिमाग का दायां हिस्सा और बायां हिस्सा दोनों एक साथ काम करेगा तभी हमें हमारे दिमाग से अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए पूरी ताकत मिलेगी। 

    इच्छाओं को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत और नकारात्मकता से बचें-

    देखिये हर इंसान इच्छा जरूर रखता है लेकिन कुछ लोग अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं और कुछ केवल अपने सपनों में ही खोये रहते हैं।

    मात्र कल्पना करने से कुछ हासिल नहीं होता बल्कि सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत करना बेहद जरूरी है। अब आप कहेंगे कि जब मेहनत ही जरूरी है तो लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन का क्या काम

    समझिए इस बात को कि लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन एक प्रकार की सोची गई इच्छाओं को पूरा करने वाली दिमागी शक्ति है। जिसे हम स्वयं द्वारा विकसित कर इच्छित चीजों को अपनी ओर आकर्षित कर सकते हैं।

    लेकिन हमें अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए मेहनत करना भी जरूरी है। कुल मिलकर आकर्षण की शक्ति आपको चाहिए तो आपको अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी और नकारात्मक विचारों से खुद को सुरक्षित रखना पड़ेगा।

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    अंत में-

    देखिये "आकर्षण का सिद्धांत (law of attraction)" मूल रूप से ब्रह्मांड और उसकी ऊर्जा से अपनी बात को सकारात्मक व भावनात्मक भाव से कहना है। मतलब आपके विचारों की अभिव्यक्ति, सकारात्मक और कल्याणकारी हो,

    इस तरह की अभिव्यक्ति ब्रह्मांड में सर्वत्र मौजूद रहती है। और आपके सकारात्मक, कल्याणकारी अभिव्यक्त विचारों के शब्दों से जल्द ही आकर्षित होकर आपके सपनों और इच्छाओं पूरा कर देगी। यही आकर्षण का कानून है, जिसे समझ कर हम सभी को अपना जीवन आनंदमय बनाना चाहिए.

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    धन्यवाद!

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