इंटरनेट पर डीपफेक्स का बढ़ता खतरा | Deepfakes in hindi

Danger of growing Deep Fakes on the Internet

ज इंटरनेट एक तरह से हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है और आज के समय में हमारे जीवन के बहुत सारे स्पेशल मोमेंट अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (A.I.) के माध्यम से इंटरनेट से जुड़े हुए हैं। 


इसी के साथ हम अपनी लाइफ का एक बहुत बड़ा हिस्सा इंटरनेट पर जी रहे हैं। मतलब इंटरनेट एक तरीके से नये समाज का आईना बन चुका है जहां पर एक अलग दुनिया है और जिसके लगभग हम सब सदस्य हैं या कह लीजिए कि हम इंटरनेट की आभासी दुनिया के नागरिक बन चुके हैं। 


Deep-fakes
डीपफेक्स का एक उदाहरण
Image credit : Eliza Strickland, website : IEEE Spectrum

लेकिन क्या जानते हैं, कि अगर कोई भी डाटा (सामान्य या आपत्तिजनक) एक बार इंटरनेट पर आ गया या अपलोड कर दिया गया तो फिर उस डाटा को इंटरनेट से कोई भी हटा नहीं सकता,

 

और अगर आप चाहें भी तो इंटरनेट से अपने उस डाटा (तस्वीर या वीडियो) को हटाने या हटवाने के लिए प्रयास करें या कराएं तो आपकी पूरी जिंदगी निकल जाएगी, फिर भी आपको इस बात कि कोई गारंटी नहीं मिलेगी कि आपको सफलता मिलेगी या नहीं?

 

नमस्कार साथियों! स्वागत है आपका वेबसाइट में, और आज हम एक ऐसे मुद्दे पर बात करने जा रहे हैं जिसका ट्रेंड इंटरनेट पर जोरों-शोरों से बढ़ता जा रहा है, मतलब आज हम बात करेंगे इंटरनेट पर बढ़ते डीपफेक्स के खतरे (Danger of growing Deep fakes on the Internet) के बारे में, तो चलिये शुरू करते हैं-

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (A.I.)-

    डीपफेक्स के बढ़ते खतरे को समझने लिए सबसे पहले हम बात करेंगे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (A.I.) की। आखिर क्या है यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (A.I.)? और कैसे हमें प्रभावित करता है? artificial intelligence (A.I.) जिसे हिन्दी में "कृत्रिम बुद्धि या बुद्धिमत्ता" के नाम से जाना जाता है,

     

    "यह एक ऐसा प्रोग्राम या एल्गोरिदम है जो इंटरनेट की आभासी दुनिया के उपयोगकर्ताओं के व्यवहार और गतिविधि को मानीटर करता है, साथ ही उपयोगकर्ताओं द्वारा चाही गई जानकारी को समझकर सबसे सर्वोत्तम परिणाम (रिज़ल्ट) उपलब्ध कराता है।"

     

    सामान्य शब्दों में कहें तो- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (A.I.) मशीन की एक ऐसी algorithm है, जो सोचने, समझने के साथ best result देने का काम करती है। कुल मिलाकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (A.I.) को कंप्यूटर की उन्नत कृत्रिम बुद्धि कहा जाता है।


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    अब बात करते हैं- यह कैसे प्रभावित करता है? आज जिस समाज में हम रह रहे हैं, सही मायनों में देखा जाए तो पूरी तरह से टेक्नोलॉजी पर निर्भर है, और हर एक व्यक्ति टेक्नोलॉजी से कहीं न कहीं अपनी समस्याओं का समाधान निकलता या निकालने की कोशिश जरूर करता है। उदाहरण के तौर पर देखें जैसे- सोशल मीडिया, जिसे आज की तारीख में लगभग सभी इस्तेमाल करते हैं।

     

    आज ढेरों सोशल मीडिया प्लेटफार्म मौजूद हैं जहां पर हम और आप अपने सवालों और जवाबों के साथ अपने विचारों एवं भावनाओं को एक-दूसरे से टेक्स्ट, फोटो या फिर वीडियो द्वारा व्यक्त या साझा करते हैं


    लेकिन क्या आपको इस बात का जरा सा भी अंदाजा है कि आपके द्वारा share की गई तस्वीर या वीडियो के आगे भविष्य में कितने खतरनाक परिणाम आ सकते हैं?


    तस्वीरों से हो रही छेड़छाड़-

    देखिये! सामान्य तौर पर आज सोशल मीडिया पर सभी का अकाउंट होता है जहां पर कोई भी अपनी भावनाओं और विचारों को समाज के साथ तस्वीर (फोटो) और कई अन्य माध्यमों से व्यक्त या पोस्ट करता है। लेकिन क्या आपको पता है कि इंटरनेट पर आपके द्वारा डाली गई पोस्ट के कितने खतरनाक परिणाम आ सकते हैं

     

    अगर नहीं! तो जान लीजिये आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (A.I.) की मदद से आपकी मूल तस्वीर से छेड़छाड़ कर उसका स्वरूप बदला जा सकता है और डीप-फेक्स बनाया जा सकता है। "यहां पर डीप का मतलब गहरा और फेक्स का मतलब नकली (अधिकतर मामलों में अश्लील) से है।

     

    ऐसा ही कुछ हाल ही में दुनिया भर की लाखों महिलाओं के साथ हुआ है। इन महिलाओं की तस्वीरों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से डीप-फेक्स (अश्लीलता) में बदलकर इंटरनेट पर परोसा गया। जो कि बहुत ही घिनौना काम है


    हालांकि मेरी समझ के अनुसार डीप फेक्स बनाने वाले लोग पूरी तरह से मानसिक रोगी ही हैं। जो न केवल अपना अहित कर रहे हैं बल्कि पूरे समाज और दुनिया के लिए भी बड़ा खतरा बन रहे हैं।

     

    यह सच है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (A.I.) की मदद से किसी की भी तस्वीरों से छेड़छाड़ कर उनको अश्लील तस्वीरों में बदला जा सकता है। डीपफ़ेक्स तकनीक की मदद से इन महिलाओं की मूल तस्वीरों से छेड़छाड़ कर डीपफेक्स बनाया गया और मशहूर ऐप टेलीग्राम पर शेयर किया जाने लगा। 

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (A.I.) की मदद से बनाए गए फोटोज और वीडियोज देखने में इतने रियल/वास्तविक लगते हैं कि आपको लगेगा ही नहीं की जो आप देख रहे हैं वह असली है या नकली (Deep fakes) है। 

     

    चूंकि जो भी चीज एक बार इंटरनेट पर आ जाती है तो उस चीज को इंटरनेट से पूरी तरह से हटाना या हटा पाना लगभग किसी के लिए संभव नहीं। यही चीज इन महिलाओं के साथ भी हुई, अब इन महिलाओं की तस्वीरें कैसे हटेंगी, यह किसी को नहीं पता


    खुद इन महिलाओं को भी नहीं पता? आगे चलकर हो सकता है कि इन तस्वीरों का असर इनके व्यक्तिगत जीवन पर भी पड़े और यह भी हो सकता है कि आगे का शर्मिंदगी भरा जीवन हो?

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    सुरक्षा की ज़िम्मेदारी-

    डीपफेक्स बनाने वाली टेक्नोलॉजी तो हमने बना या विकसित कर ली लेकिन इसके गलत परिणामों को रोकने का उपाय कौन करेगा? इस मामले को आज दुनिया भर की सरकारों और बड़ी-बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को deep मतलब गहराई से समझना और लोगों को समझाना होगा। 
    अगर कोई बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनी डीपफ़ेक्स के खतरों को रोकने के उपाय को विकसित करती है तो इस जानकारी (नॉलेज) का बटन किसके हाथ में रहेगा- सरकार के या फिर उस कंपनी के? यह कौन तय करेगा कि इंटरनेट पर किसकी तस्वीर रहेगी और किसकी तस्वीर हटा दी/ली जाएगी। 

     

    आपको पता ही होगा कि दुनिया भर में न्यूक्लियर बम के बटन को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है और कहा जाता है कि जिसके पास इस बटन का कंट्रोल होता है वही सबसे शक्तिशाली है, वहीं इस डीपफेक्स टेक्नोलॉजी! जो कि आम जीवन को प्रभावित करने लगी है, का बटन किस कंपनी के हाथ में है? साथ ही यहां पर सवाल यह उठता है कि यह टेक्नोलॉजी नियंत्रण में कैसे आ सकती है?

     

    उन पीढ़ित महिलाओं के साथ हमें भी यह समझना जरूरी है कि इंटरनेट उपयोग करते समय किन किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है? एक सर्वे के मुताबिक पूरी दुनिया से हर रोज सोशल मीडिया पर लगभग 180 करोड़ तस्वीरें अपलोड की जाती या अपलोड होती हैं। 

    यह लगभग पूरी दुनिया की इस समय की आबादी के बराबर है। अपलोड की गई फोटोज़ में सबसे ज्यादा selfi photos होती हैं, और इन सेल्फी पोस्ट्स में से महिलाओं द्वारा पुरुषों के मुकाबले बहुत ज्यादा डाटा इंटरनेट पर अपलोड किया जाता है।

     

    अगर आप महिला हैं तो हो सकता है की आज आपने भी अपनी कोई ना कोई तस्वीर फेसबुक, इंस्टाग्राम या फिर व्हाट्सएप पर अपलोड जरूर की होगी। अब इस पर गौर कीजिये कि जो तस्वीरें आपने सोशल मीडिया के माध्यम से इंटरनेट पर पोस्ट की हैं 


    क्या आपको जरा सा भी अंदाजा है कि आपकी यह तस्वीरें अगर अपराधियों या विक्षिप्त मानसिकता वाले लोगों के हाथ लग गई तो वे इन तस्वीरों के साथ क्या-क्या कर सकते हैं


    साइबर अपराधी इन तस्वीरों के साथ वह सब कुछ कर सकते हैं जिसकी आपने और आपके परिवार ने कभी कल्पना तक नहीं की होगी। आपकी इन अपलोड कि गई तस्वीरों को बड़ी आसानी से Deep fakes नामक टेक्नोलॉजी की मदद से अश्लील तस्वीरों में बदला जा सकता है। 


    एक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक सोशल मीडिया पर डाली गई 100000 महिलाओं की तस्वीरों को अश्लील तस्वीरों में बदल दिया गया। 

     

    और इस बात का खुलासा इंटरनेट पर मौजूद फ़ेक्स कांटेक्ट का पता लगाने वाली एक कंपनी sensity ने किया है। कंपनी के मुताबिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से इन 100000 महिलाओं की तस्वीरों को अश्लील तस्वीरों में बदला गया है और जांच में यह पता चला कि सब एक डीपफेक्स बोट्स की मदद से किया गया है। 

     

    अगर आप बोट्स के बारे में नहीं जानते तो आपको बता दें कि बोट्स इंटरनेट पर मौजूद वे एजेंट या प्रोटोकॉल एल्गोरिदम हैं जो आप (यूजर) द्वारा चाहे गए डेटा को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (A.I.) की मदद से उपलब्ध कराते हैं, और ये बोट्स कई तरह के होते हैं। 


    बचने के उपाय-

    डीपफेक्स तकनीक से बचने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि हमें इंटरनेट पर अपनी गतिविधि को नियंत्रित करना होगा और कम से कम खुद के व्यक्तिगत डेटा को अपलोड करना होगा। विशेष तौर पर मेरा अनुरोध उन महिलाओं से है जिनको अपनी सेल्फी लेने और सोशल मीडिया पर अपलोड करने की लत है। 


    देखिये! साइबर अपराधियों को किसी भी विशेष तौर पर सेल्फी फोटोज में खास रुचि होती है क्योंकि सेल्फी फोटो उच्च गुणवत्ता वाली होती है और उच्च गुणवत्ता वाली फोटोज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए.आई.) की मदद से डीपफेक बनाना बेहद आसान हो जाता है। 

    इसलिए यदि आपको इस डीपफेक्स टेक्नोलॉजी के दुष्परिणाम नहीं झेलने हैं तो थोड़ा समझौता तो करना ही पड़ेगा।


    • अपने सोशल मीडिया अकाउंट को सुरक्षित और लॉक जरूर करें।

    • यदि फोटोज share करना जरूरी है तो लो रेजुलेशन वाली और पूरे शरीर की ही फोटोज ही अपलोड करें। ऐसा करने से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए.आई.) को आपके चेहरे कॉपी बनाने में परेशानी पैदा होगी।

    • सेल्फी के बजाए दूरी से ली गई फोटोज को ही अपलोड या शेयर करें।

    • अपनी सोशल मीडिया प्रोफ़ाइल को अपने दोस्तों तक ही सीमित रखने का प्रयास करें।
    • मोबाइल फोन में इंस्टॉल एप्लीकेशनस को दी गई स्वीकृतियों (परमीशन) को चेक करें, यदि जरूरी हो तो ही दें अन्यथा स्वीकृति हटा दे, साथ ही अनचाही एप्लीकेशनस को अपने मोबाइल से तुरंत अन-इंस्टॉल कर दें।


    डीपफेक्स का चस्का (लत) एक शोध-

    अपने द्वारा किए गए शोध में मैंने पाया कि जिन लोगों को डीपफेक्स का चस्का या लत लगी है उनमें खुद का विकास करने या खुद को सफल बनाने की संभावना सामान्य की अपेक्षा बहुत कम है


    ऐसे लोगों को प्रायः अपने जीवन का लक्ष्य ही नहीं पता होता और न ही ये इस पर ध्यान ही देते हैं, इनकी सोच सामान्य की अपेक्षा संकीर्ण और दुराचारी प्रवृत्ति की होती है, और अभद्र भाषा ही इनकी मूल भाषा है। 


    वहीं मनोवैज्ञानिक दृष्टि से आंकलन करने पर डीपफेक्स (पोर्न/अश्लील) देखने वाले लोग पूरी तरह से मानसिक रोगी ही हैं क्योंकि डीपफेक्स देखने वाले बताते हैं वे जब इस तरह का कंटेंट देखते हैं तो उन्हें "बहुत अच्छा महसूस" होता है। 

    हालांकि इसके बाद मेरा अगला सवाल था कि अच्छा महसूस करना और संतुष्टि में क्या फर्क है? वैसे कुछ लोग शराब पीकर भी अच्छा महसूस करते हैं, लेकिन क्या वो संतुष्ट भी हैं या नहीं? इस पर उन लोगों में से किसी ने कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी


    देखिये! सरकार द्वारा प्रतिबंधित किए जाने के बाद भी पोर्नोग्राफी खुफिया तरीके से हमारे देश में पैर पसार रही है जो न केवल हमारी बल्कि उभरती हुई युवा पीढ़ी की मानसिकता पर गहरा प्रभाव डालने का प्रयास कर रही है। और यदि ऐसा होता रहा तो एक दिन हम सभी का भविष्य अंधकारमय होना निश्चित है।

     

    अपने शोध में मैंने किशोर व युवा वर्ग को ही डीपफेक्स जैसी गतिविधि में सक्रिय पाया, वैसे कुछ बुजुर्गों को भी इस शोध में शामिल किया गया था लेकिन अधिकतर मामलों में या तो उन्हें डीपफेक्स के बारे में पता ही नहीं था, या फिर उन्होंने इस शब्द को पहली बार सुना था।


    अंत में-

    समझिए इस बात को कि आज का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए.आई.) इतना विकसित और समझदार हो चुका है कि आपके द्वारा की गई एक गलती आपका पूरा भविष्य अंधकार में डाल सकती है। हालांकि किसी भी तकनीक को विकसित इसीलिए किया जाता है

    जिससे समाज और उसमें रहने वालों की मदद की जा सके, लेकिन हममें से ही कुछ विक्षिप्त मानसिकता के लोग हैं जो किसी न किसी तरीके से इन टेक्नोलॉजीज का गलत इस्तेमाल कर खुद के साथ पूरे समाज को गर्त में गिरने का प्रयास करने से बाज नहीं आते।

     

    आज की पोस्ट में अभी तक इतना ही, उम्मीद करता हूँ आपको आज की पोस्ट "इंटरनेट पर डीपफेक्स का बढ़ता खतरा" से कुछ नई चीजों और बातों का पता जरूर चला होगा, समय-समय पर इस पोस्ट को अपडेट किया जाता रहेगा, पोस्ट पसंद आई हो, 


    साथ ही इससे संबंधित कुछ पूछना या कहना चाहते हैं तो comment box में लिखें, इस जानकारी को अपने दोस्तों और जरूरतमंद लोगों के साथ share करना न भूलें। आपका एक share किसी के जीवन को नई राह दिखा सकता है।

     

    अंत में- "सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और समाज की उन्नति में अपना सहयोग दें।"

     

    धन्यवाद!

    जय हिन्द! जय भारत!left-sidebar

     

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