I.Q. को दूसरों से बेहतर कैसे बनाये? (How to Increase IQ in Hindi) भाग-2

मस्कार मित्रों  स्वागत है आपका हमारी वेबसाइट पर और आज हम बात करेंगे "I.Q. को दूसरों से बेहतर कैसे बनाये? भाग-2" की। पहले भाग में आपको I.Q. को दूसरों से बेहतर बनाने के लिए कई तथ्यों से अवगत कराया था 


जैसे- वास्तविक आयु क्या है? I.Q.  (बुद्धि लब्धि सूत्र) क्या है?  (IQ Level Kaise Check Kareऔर बुद्धि लब्धि कैसे निकाले? इत्यादि। इसी क्रम में आज और तथ्यों की बात करेंगे-


देखिए! खुद को दूसरे से बेहतर कैसे बनाये? (How to increase IQ level of brain), स्वयं को कैसे जाने?, अपने आप को कैसे बदलें? और मन को कैसे खुश रखे? ये कुछ ऐसे प्रश्न हैं जो लगभग आज के समय में सभी को कहीं न कहीं परेशान जरूर करते हैं

लेकिन क्या आपको पता है जब हम अपने आपसे इस तरह के प्रश्न पूंछते हैं तब असल में जाने-अनजाने में अपनी उन्नति को आकर्षित करते हैं 


और धीरे-धीरे हम चीजों को सीखना शुरू कर देते हैं जिससे हमारी क्रियाशीलता (प्रोडक्टीविटी) औरों से बढ़ जाती है लेकिन क्रियाशीलता को बेहतर करने में कई दिक्कतों का सामना भी करना पड़ता है, ऐसी ही कुछ बातों को इस लेख में बताया गया है कि क्या करना है और क्या नहीं? जिससे आप दूसरों से बेहतर बन सकें-

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I.Q. को दूसरों से बेहतर कैसे बनाये? (How to Increase IQ in Hindi) भाग-2 

    मल्टीटास्किंग करना बंद करें-

    एक बार में एक ही काम करें यानी एक बार में एक ही काम पर एकाग्रता बनाए। आज के दौर में मल्टीटास्किंग शब्द का बहुत चलन हो गया है। "मल्टीटास्किंग मतलब एक साथ बहुत सारे कामों को संभालना।


    जैसे- आज के समय में बहुत से लोग खाना खाते समय में TV देखते हैं और साथ में अपने मोबाईल फोन को भी चेक करते रहते हैं। इन अतिरिक्त कार्यभार/वर्कलोड के कारण उनका दिमाग भ्रमित हो जाता है और अपने मुख्य काम को करने में पूरी एकाग्रता नहीं दिखा पाता है।


    इंसानी दिमाग एक समय में एक ही काम करने के लिए बना है। दो नावों पर पैर रखेंगे तो ना घर के रहेंगे और न ही बाहर के। जब आप एक काम कर रहे हों तो दूसरे के बारे में मत सोचो, अपने उसी एक काम पर फोकस करिए क्योंकि जब आप किसी एक काम को महत्व देते हैं

    एक काम के लिए ही एकाग्र होते हैं तो वही एक काम आपको आपकी जिंदगी में सफलता दिलाने के लिए पर्याप्त है।  


    इसलिए फिर से कहना चाहूंगा कि मल्टीटास्किंग करना बंद करें और एक समय में एक ही काम करें, जिससे आप अपने दिमाग का कुशलता और दक्षता पूर्वक इस्तेमाल कर सकें और दिमाग की पूरी शक्तियों का ताला खोल सकें।


    गहरी सांस लेने का व्यायाम (Deep Breathing Exercise)-

    हरी सांस लेने का व्यायाम (Deep Breathing Exercise) आपके, हमारे लिए और सभी जीवित प्राणियों के लिए सबसे जरूरी व्यायाम है। क्या आपको अंदाजा है कि आपके शरीर और दिमाग के लिए ऑक्सीजन कितनी जरूरी है

    बहुत लोग कहते हैं कि वह हमेशा हल्का मतलब खुला-खुला महसूस नहीं करते। उनको उनका दिमाग हमेशा भारी यानी कि थका हुआ महसूस होता है। उनको ऐसा लगता है कि उनके दिमाग में ट्रैफिक जाम हो चुका है। इसका नंबर वन कारण है "ऑक्सीजन की कमी या ऑक्सीजन का कम संचालन" 


    वजन के मामले में औसतन इंसान का दिमाग इंसान के शरीर का मात्र 02% ही होता है। लेकिन आपका दिमाग आपके शरीर की पूरी ऑक्सीजन का 20% इस्तेमाल करता है। इसका मतलब ऑक्सीजन आपके दिमाग का ईंधन है। 


    इसलिए गहरी सांस लेने का व्यायाम आपके लिए बहुत ही जरूरी है। सुबह-सुबह उठने के बाद 10 से 15 मिनट योग मुद्रा में बैठकर सांस जरूर लें। 


    इससे आपके दिमाग में सामान्य के मुकाबले 14% ज्यादा ऑक्सीजन पहुंचेगी और सुबह 10 से 15 मिनट सांस के व्यायाम से इसका प्रभाव आपके दिमाग और शरीर पर पूरे दिन भर रहेगा। जिससे आपको अपना काम करने में मन भी लगेगा। 

    अगर पढ़ाई कर रहे हैं तो अच्छे से पढ़ पाएंगे और थकावट तथा मन भटकाव भी नहीं होगा क्योंकि सुबह-सुबह आपने अपने शरीर को शुद्ध ऑक्सीजन से उद्दीप्त कर दिया है। इसलिए गहरी सांस का व्यायाम जरूर करें और अपनी I.Q. की शक्ति को बढ़ाएं 


    सपनों को अवलोकन करने की कोशिश करना-

    सपनों को अवलोकन करने की कोशिश क्यों की जाए? इसके पीछे की वजह क्या है? तो आज जान लीजिये इसके पीछे की वजह यह है कि आपका दिमाग दिन भर व्यस्त रहता है अपने कामों को करने में। 


    चाहे आप पढ़ाई कर रहे हों या और कोई अन्य काम। लेकिन सही बात तो यह है कि आपका दिमाग जितना सक्रिय दिन के समय रहता है या जितनी हलचल दिन में आपके दिमाग के अंदर होती है। लगभग उतनी ही हलचल रात को जब आप सोते हैं तब भी होती है। 

    यहां पर  "लगभग" शब्द का मतलब है थोड़ी सी हलचल कम होती है पर सोते समय ये थोड़ी सी हलचल भी अच्छी खासी होती है या महसूस होती है। 


    दरअसल यह हलचल भी आपके बहुत काम की होती है लेकिन यह हलचल आखिर है क्या? जब आप सोते हैं तब आपका अवचेतन मन दिमाग में अंदर ही अंदर काम करता रहता है और आपकी समस्याओं का हल व उत्तर ढूंढने लगा होता है।  


    आपके दिमाग में सोते समय कुछ ना कुछ चलता ही रहता है। मुख्य तौर पर आपकी समस्याओं को हल व उनके उत्तर ढूंढने की क्रिया चलती ही रहती है। जिसकी वजह से आपको सोते समय या नींद के दौरान सपने आते हैं। 


    आपका दिमाग आपकी समस्याओं को हल करने के लिए सांकेतिक भाषा के जरिए आपको सपने दिखाता है। और जैसे ही आप अपनी समस्या को दूर कर देते हैं तो उसके बाद आपका अवचेतन मन रिलैक्स हो जाता है। 


    लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि बहुत से लोग अपने सपनों को याद ही नहीं रख पाते। सुबह उठने के साथ ही वे अपने सपनों को भूल जाते हैं। और अपनी समस्याओं का समाधान ढूंढने की कोशिश करने में लग जाते हैं। 

    पर आपकी भूलने की आदत में सुधार किया जा सकता है और स्मरण शक्ति (बुद्धि परीक्षण) को बढ़ाया जा सकता है। जैसे- जिस तरह से मोबाइल के संपर्क सूत्र याद करने से आपकी स्मरण शक्ति उद्दीप्त होती है। 


    ठीक उसी तरह जब आप सपनों को याद करने की कोशिश करते हैं तब आप अपने दिमाग के बड़े गहरे स्तर को स्पर्श करते हैं जिससे आपकी स्मरण शक्ति एक गजब तरीके से उद्दीप्त होती है। इसलिए सुबह उठने के बाद थोड़ा व्यायाम करें और "आज मैंने सपने में क्या देखा?" इस पर जरूर गौर करें। 


    कृतज्ञता/शुक्रिया (Gratitude) की भावना- 

    कृतज्ञता/शुक्रिया (Gratitude) मतलब इस ब्रह्मांड को उन चीजों के लिए धन्यवाद, शुक्रिया बोलना या कहना जो चीज आपके पास पहले से ही मौजूद है और यह वास्तव में दिमाग को तेज करता है। 


    आप कहेंगे कैसे? असल में जब आप उन चीजों के लिए ब्रह्मांड को धन्यवाद, शुक्रिया बोलते हैं जो आपके पास पहले से ही है। तो ये आपके दिमाग के रसायनों को संतुलित करने में मदद करता है।

     

    कृतज्ञता/शुक्रिया (Gratitude) की भावना आपको सकारात्मक बनाती है। जिससे आप ज्यादा खुश रहने लगते हैं क्योंकि जब आप किसी को धन्यवाद या शुक्रिया कहते हैं तब आपके दिमाग के अंदर के गुस्से, ईर्ष्या और द्वेष वाले रसायन संतुलन में आने लगते हैं 


    और धन्यवाद या शुक्रिया की अवस्था में आपकी एकाग्रता और बुद्धिमत्ता यानी कि I.Q. का स्तर बढ़ जाता है। अगर आप उन चीजों के लिए कृतज्ञता/शुक्रिया की भावना नहीं रखेंगे जो आपके पास पहले से ही मौजूद हैं। तब आपको वह चीजें भी नहीं मिल सकतीं जिनकी आपको चाह है या कामना है। 


    एक रिपोर्ट के मुताबिक जो लोग 80 या 90 साल तक जीवन जीते हैं, उनका राज यही है। आपको यकीन नहीं होगा कि जो लोग लंबी उम्र जीते हैं जैसे- 80, 90 और 100 साल उनमें से ज्यादातर लोग उस चीज के लिए ब्रह्मांड को धन्यवाद बोलते थे 


    या शुक्रिया अदा करते थे। जो चीज उनके पास पहले से ही है और जिसके चलते उन लोगों को उनकी जिंदगी में सब कुछ मिल गया जो वो चाहते थे क्योंकि वह हमेशा उन चीजों के लिए कृतज्ञता/शुक्रिया की भावना रखते थे जो उनके पास पहले से ही है। 

    मतलब यह कृतज्ञता/शुक्रिया की भावना आपके दिमाग पर ही नहीं पूरे शरीर पर सकारात्मक प्रभाव डालता है और यह भावना रखने से आपको गुस्सा भी कम आएगा। जिससे आपकी चीजों को समझने की शक्ति का दायरा बढ़ और बड़ा हो जाएगा।


    शरीर को हाइड्रेट करना-

    सुबह उठने के बाद अपने शरीर को हाइड्रेट करना बहुत जरूरी है। सुबह-सुबह 3 से 4 गिलास पानी पीने से आपका शरीर पूरी तरह से हाइड्रेट हो जाता है। देखा जाये तो पानी वास्तव में आपके दिमाग के लिए सबसे जरूरी चीज है। 


    आपका दिमाग 73% पानी का बना हुआ है पर हममें से ज्यादातर लोग इस बात पर ध्यान नहीं देते। हो सकता है कि आपको यह पानी वाला तथ्य पहले से पता होगा लेकिन तब भी आप इस पर ध्यान नहीं देते। और ये ही नहीं, असल में जितने भी तथ्य और उपचार के उपाय (Tips) हैं दिमाग तेज करने के लिए 

    वो सभी कहीं ना कहीं आपने पहले भी पढ़ी, सुनी या देखीं जरूर होंगी ये सभी सामान्य बातें हैं। असल में यहां पर मैं आपको उन्हीं बातों को फिर से याद दिला रहा हूं ताकि आप इनके फायदों को गहराई से समझें और इनसे लाभ लेने की शुरूआत करें जिससे आपका दिमाग एक तीव्र बुद्धि वाला सुपर ब्रेन बन सके। 


    दिमाग को तेज करने वाले खानपान-

    अब हम बात करेंगे दिमाग को तेज करने वाले खानपान की.... देखा जाए तो जैसा भोजन हम अपने खान-पान में लेते हैं हमारा व्यक्तित्व और हमारी चीजों को समझने की शक्ति वैसी ही बनती जाती है


    अक्सर कई बार हमारा खान-पान अन्य घरों (पड़ोस/बगल) के खानपान से प्रेरित होता देखा गया है. लेकिन क्या यह सही है? क्या जो दूसरे भोजन करते हैं वह हमारे लिए भी सही और उचित होगा

    देखिए! मैं किसी (अपने करीबी) का अनुसरण करने से नहीं रोक रहा हूँ बल्कि आपको इस बात को समझने की जरूरत है कि आप जो खाते हैं या खा रहे हैं क्या वो आपके लिये सही है? क्या आपका वो भोजन आपकी बौधिक क्षमता और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ता है या नहीं?  


    असल में अगर हमें अपने दिमाग को दूसरों से तेज करना है और अपनी आई.क्यू. के स्तर को बढ़ाना है तो हमें एक अच्छे और पोषक तत्वों से संतुलित भोजन या खान-पान को लेना ही होगा


    दिमाग की रीकाल प्रोसेस के लिए पोषक तत्वों से भरे संतुलित भोजन की अत्यधिक आवश्यकता होती है, और ऐसे ही कुछ खान-पान हैं जिनका उल्लेख अब किया जा रहा है-


    सूखे मेवों का सेवन (Use Dry Fruits)-

    लगभग 10 बादामों को रात में सोने से पहले एक कटोरी पानी में भिगो दें, फिर सुबह इन भीगे हुए बादामों के छिलके उतारकर पीसें और इनका पेस्ट बना लें, इसके बाद एक गिलास गर्म दूध लें 

    और बादाम के पेस्ट को इसमें मिला दें साथ ही इसमें 03 चम्मच शहद डालकर अच्छे से मिला लें, जब गर्म दूध गुनगुना हो जाए तब ही इस मिश्रण का उपभोग करें. उपभोग करने या मिश्रण पीने के बाद डेढ़ घंटे बाद ही अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन करें.


    बादाम में कैल्शियम, विटामिन ई, फाइबर, राइबोफ्लेविन, जिंक, मैग्नीशियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड नियासिन किसी भी अन्य नट्स की तुलना में अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। जो कि इंसानी शरीर के लिए बेहद ही आवश्यक तत्व हैं. 28 ग्राम बादाम से लगभग 160 कैलोरी मिलती है.


    अखरोट जिसमें विटामिन-B, विटामिन B-2, विटामिन-C, विटामिन-K के साथ ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है और इसके साथ अखरोट फाइबर, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और आयरन से भी भरपूर होता है

    साथ ही यदि कोई मेवा (ड्राई फ्रूट) इंसानी दिमाग की तरह दिखता है तो वह केवल अखरोट ही है. प्रतिदिन लगभग 20 ग्राम अखरोट के साथ 10 ग्राम किशमिश लेने से शारीरिक और दिमागी (मानसिक) ताकत बढ़ती है.


    बी श्रृंखला का प्रत्येक विटामिन हमारे दिमाग की शक्ति बढ़ाने के लिए उपयोगी और महत्वपूर्ण होता है. फोलिक एसिड को विटामिन बी-9 या फोलेट के नाम से जाना जाता है, जिसे दिमाग के लिए एक ख़ास विटामिन भी माना जाता है 


    साथ ही विटामिन बी-12 जिसे कोबालमीन (Cobalamin) के नाम से भी जाना जाता है, बेहद ही उपयोगी है. बी-12 की कमी से बेरी-बेरी नामक रोग होता है.


    दालचीनी के पाउडर को शहद में मिलाकर चाटने से दिमागी शक्ति का विकास होता है, कमजोर दिमाग को बलवान बनाने की अच्छी दवाओं में से एक है. हर ड्राई फ्रूट हमारे शरीर और दिमाग को मजबूती प्रदान करता है

    और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है. इसलिए अच्छे और बेहतर शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए हमें इन सूखे मेवों का उपभोग जरूर करना चाहिए.


    फलों और सब्जियों का सेवन-

    सबसे पहले मौसमी फलों और सब्जियों का विशेषकर सेवन जरूर करना चाहिए, ये आपके शरीर और दिमाग दोनों को स्वस्थ और तंदुरुस्त बनाते हैं. प्रकृति का वरदान हैं ये फल और सब्जियां


    हमारी खाद्य श्रृंखला में इनका विशेष महत्व है. सेब, केला, संतरा, अंगूर, अनानास, नाशपाती, पपीता, चीकू और कई अन्य फलों के साथ गाजर, पत्ता गोभी, चुकंदर, पालक, बथुआ, सोया-मेथी, हरा धनिया, भिंडी आदि सब्जियों का सेवन करते रहना चाहिए

    सेब के बारे में कहा जाता है कि "रोज एक सेब का सेवन करने से स्मरण शक्ति मजबूत होती है और कोई रोग भी नहीं होता".


    इसके साथ ही यदि आप या आपके घर में साधारण नमक का उपयोग होता है तो उसका प्रयोग कम (न के बराबर) करें बल्कि इसके स्थान पर आप सेंधा नमक का उपयोग करें, जो आपके हाजमे को साधारण नमक से ज्यादा दुरुस्त करता है 


    और दिमाग को ज्यादा क्रियाशील बनाता है. साथ ही रक्तचाप से संबंधित बीमारियों से भी बचाव करता है. अब प्रश्न उठता है कि आयोडीन की कमी को कैसे पूरा किया जाये? तो इसके लिए आप साधारण नमक महीने में 3 से 4 बार प्रयोग कर सकते हैं, आपकी आयोडीन की कमी पूरी हो जाएगी.


    मांस का सेवन-

    शारीरिक विकास और मानसिक स्वास्थ्य के लिए मांस का सेवन कोई अच्छा विकल्प नहीं है, मांस का सेवन दो ही ही शर्तों पर किया जाना चाहिए-

    1. या तो मानव जाति के अस्तित्व का संकट हो,

    2. या फिर किसी बीमारी को ठीक करने के लिए चिकित्सक द्वारा सुझाया गया हो.


    लेकिन आज के परिदृश्य में देखने को मिलता है कि कुछ लोग अपने मनोरंजन या स्वाद के लिए निर्दोष जीवों और पशु-पक्षियों को निर्ममता से मौत के घाट उतार देते हैं और बड़े चाव से उनका मांस पकाकर खाते हैं


    हालांकि यह सच है कि मांस खाने से इंसानी शरीर की कई जरूरते पूरी हो जाती हैं लेकिन इससे प्रकृति का संतुलन भी प्रभावित होता (बिगड़ रहा) है और एक-एक कर धीरे-धीरे कई जीव विलुप्ति के कगार पर आ चुके हैं.


    और वैसे भी मांस का सेवन इसलिए भी सुरक्षित नहीं है क्योंकि जीवों के मांस में कई तरह के विषाणु (बैक्टीरिया) भी होते है, जो कि कम से कम और ऊंचे से ऊंचे तापमान पर भी उस मांस में जीवित रहते हैं 

    और मांस का सेवन करने वाले उस व्यक्ति को बेहद लम्बी और गहरी क्षति पहुंचा सकते हैं. ऐसा कुछ आज पूरे विश्व में वैश्विक महामारी के रूप में चल भी रहा है- नोवल कोरोना वायरस (कोविड-19) आप जानते ही होंगे.


     

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    अंत में-

    दिमाग को तेज करना और अपने आई.क्यू. के स्तर को बढ़ाना आपके खुद के हाथ में है, बस आपको प्रयास करने की जरूरत है

    आशा करता हूँ आपको यह लेख I.Q. को दूसरों से बेहतर कैसे बनाये? भाग-2 अच्छा लगा हो और लेख में दी गई जानकारी आपके जीवन में काम आए. ऐसे ही और बातों को जानने के लिए आप हमारी वेबसाइट की सदस्यता अवश्य लें। 


    और हां अगर कोई सवाल हो या कुछ कहना चाहते हैं तो Comment Box में जरूर लिखें, साथ ही इस जानकारी को दोस्तों और जरूरतमंद लोगों को Share करना न भूलें। आपका एक share किसी को एक नई दिशा दिखा सकता है.


    अंत में यही किट्रैन योर माइंड और अपने आपको शिक्षित के साथ काबिल बनाएं."

    धन्यवाद!

    जय हिन्द! जय भारत!

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