रोग प्रतिरोधक क्षमता को कैसे मजबूत बनाएं? | How to Improve your Immunity?

कोरोना वायरस से कैसे बचा जाए? कोविड-19 का अर्थ क्या है?

आज नोवल कोरोना वायरस (कोविड-19) वैश्विक महामारी ने पूरी मानव जाति को यह संकेत दे दिया है कि अब समय आ चुका है कि आप अपनी सेहत को लेकर जागरूक हो जाइए, अपने रोग प्रतिरोधक क्षमता (immune system) को मजबूत बना लीजिये अन्यथा संक्रमण के खतरे से बच नहीं पाएंगे. 


एक स्वस्थ और निरोगी जीवन के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता का बेहतर होना बेहद जरूरी है. हमारा इम्यून सिस्टम और इसका नेटवर्क ही वह हथियार है जो हमारे शरीर को बीमारियों और संक्रमण से सुरक्षित बनता है। लेकिन क्या आपको पता है कि नोवल कोरोना वायरस को कोविड-19 क्यों कहा जाता है?


कोरोना से बचाव, immune system


    नोवल कोरोना वायरस-कोविड-19 (Novel Corona virus-COVID-19) का अर्थ-

    नोवल कोरोना वायरस-कोविड-19 में नोवल का मतलब नए से है साथ ही COVID-19 में CO का मतलब कोरोना, VI का मतलब वायरस और D का मतलब Disease यानी बीमारी से है इसके साथ ही 19 का मतलब 2019 यानी कि वर्ष 2019 में यह बीमारी प्रकाश में आई. 


    कोरोना वायरस के कई सारे प्रकार होते हैं और इनमें हमारे शरीर के वह अंग भी शामिल हैं जो आमतौर पर ऊपरी श्वसन तंत्र जैसे- साइनस, नाक की नली, जल आने-जाने की नलिका और कंठ आदि में हल्की बीमारी पैदा करता है 


    और धीरे-धीरे हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम मतलब रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर रोग-ग्रस्त करने का प्रयास करता है.


    कोविड-19 कैसे फैलता है?

    किसी भी व्यक्ति को नोवल कोरोना वायरस (कोविड-19) उन लोगों से होता या हो सकता है जो इस वायरस से संक्रमित हों। कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति जब खांसता, छींकता या सांस छोड़ता है 

    तो उसके नाक या मुंह से निकली हुई संक्रमित हवा के साथ निकली छोटी-छोटी बूंदों से यह रोग दूसरे में फैल सकता है। ये बेहद बारीक बूंदे उस संक्रमित व्यक्ति के आस-पास की जगहों या सतहों पर भी गिर सकती है।

    कोई अन्य व्यक्ति अनजाने में उस जगह या सतह के संपर्क में आकर स्वभाव वश अपने मुंह, नाक या आंख को छूता है तो वह भी कोविड-19 से संक्रमित हो सकता है। 

    कोरोना संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या सांस छोड़ने से निकली बारीक बूंदों को सांस के जरिए अंदर लेने से भी संक्रमित हो सकते हैं। 

    इसलिए यह महत्वपूर्ण है और सरकार ने भी ऐलान किया है कि (2 गज दूरी मास्क है जरूरी) संक्रमित बीमार व्यक्ति से 3-6 फीट या 1-2 मीटर दूरी बनाकर ही रखी जाए।


    कोविड-19 के लक्षण क्या हैं?

    नोवल कोरोना वायरस (कोविड-19) के मुख्य लक्षणों में शामिल है- बुखार, खांसी और सांस लेने में समस्या है। बीमार या संक्रमित व्यक्ति को थकान, बदन दर्द और नाक जाम होना, गले में खराश और उल्टी-दस्त की समस्या भी हो सकती है, 

    हालांकि कुछ लोगों के अन्दर  कोविड-19 बीमारी के संक्रमण के कोई भी लक्षण दिखाई नहीं देते और इन्हें कोई विशेष इलाज की आवश्यकता भी नहीं होती क्योंकि इनका इम्यून सिस्टम काफी हद तक मजबूत होता है,

    लेकिन कोविड-19 से संक्रमित कुछ लोग बेहद गंभीर रूप से अस्वस्थ या बीमार हो जाते हैं और उन्हें मुख्य तौर पर सांस लेने में परेशानी, बुखार और बदन दर्द की समस्या होने लगती है।  

    बुजुर्ग (लगभग 65 वर्ष आयु वर्ग) और जिन लोगों को पहले से हृदय रोग (heart disease), मधुमेह (Diabetes) और फेफड़ों की गंभीर समस्या (Severe lung problem) आदि हो, विशेष तौर पर उन्हें इस बीमारी से बचने के लिए सावधानी उपाय जरूर करने चाहिए. 

    असल में व्यक्ति तभी सभी संक्रमित हो होता है जब उसका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है.


    रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune System)-

    शरीर के किसी भी दूसरे हिस्से (अंग) की तरह हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली भी उम्र बढ़ने के साथ-साथ साल दर साल कमजोर होती जाती है या जा रही है


    कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune System) होने के कारण इसका सीधा मतलब यह निकलता है कि हमारे शरीर के बीमार पड़ने और वायरसों व बैक्टीरिया से संक्रमित होने की सम्भावना  बढ़ जाती है। 

     

    कमजोर इम्यून सिस्टम के कारण ही कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी ने पूरी दुनिया को आज अपनी चपेट में ले लिया है. ढलती उम्र के बुजुर्गों को ज्यादा एहतियात और सावधानी बरतने के दिशा निर्देश देश की सरकार द्वारा दिए गए हैं। 


    चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि जो लोग 65 साल की उम्र के पार है, उनके संक्रमित होने की संभावना काफी ज्यादा है मतलब उनके लिए जोखिम तुलनात्मक रूप से अधिक है। 


    हालांकि यह जरूरी नहीं है कि इंसान का इम्यून सिस्टम बढ़ती (ढलती) उम्र के अनुपात-समानुपात में कमजोर हो। ऐसे कई लोग हैं जो कि 80 साल के हैं, लेकिन उनका इम्यून सिस्टम 62 साल का है, वहीं कई मामले इसके बिल्कुल उलट भी होते हैं। 


    अच्छी खबर यह है कि हम अपने इम्यून सिस्टम या रोग प्रतिरोधक क्षमता के कमजोर होने की प्रक्रिया को कम कर सकते हैं. इसके लिए हमें सिर्फ कुछ बातें अपनानी होंगी, लेकिन इससे पहले कि हम उन चरणों की बात करें जिससे इम्यून सिस्टम को लंबे वक्त तक दुरुस्त और तंदुरुस्त रखा जा सकता है।


    यह समझना बेहद जरूरी है कि हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता या इम्यून सिस्टम काम कैसे करता है? इम्यून सिस्टम की दो शाखाएं (मोनोसाइट्स और लिम्फोसाइट्स) होती हैं 


    हर एक शाखा अलग प्रकार की श्वेत रुधिर कोशिकाओं यानी WBC जिसे white blood cell भी कहते हैं, बनी होती है. ये कोशिकाएं खास तौर पर हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और सुरक्षा के लिए काम करती हैं। 


    जन्मजात रोग प्रतिरोधक प्रतिक्रिया हमारे शरीर की सुरक्षा के लिए प्राथमिक तौर पर उत्तरदायी होती है। जैसे ही कोई बाहरी विषाणु या रोगाणु हमारे शरीर में प्रवेश करता है, तो हमारा इम्यून सिस्टम सक्रिय या एक्टिव हो जाता है 


    और मुख्य तौर पर विषाणु और रोगाणु (बैक्टीरिया) पर हमला करता हैं. मोनोसाइट्स इम्यून सिस्टम को व्यवस्थित करने में मदद करते हैं और साथ ही यह दूसरी प्रतिरक्षा कोशिकाओं को संक्रमण के खिलाफ सचेत करने का भी काम करते हैं। 


    इसके अलावा लिम्फोसाइट्स जिन्हें एन.के. कोशिका (NK cells) या बड़े दानेदार लिम्फोसाइट्स (LGL-large granular lymphocytes) के रूप में भी जाना जाता है


    जन्मजात प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण साइटोटोक्सिक लिम्फोसाइट का एक प्रकार है (जो जन्मजात लिम्फोइड कोशिकाओं (ILC-innate lymphoid cells) के तेजी से विस्तार वाले परिवार से संबंधित हैं और 5–20% का प्रतिनिधित्व करते हैं)जो वायरस और कैंसर से लड़ने का काम करती है।


    संक्रमण से बचाव के उपाय-

    1.   कोविड-19 संक्रमण से बचाव के लिए सबसे बेहतर उपाय है- सोशल डिस्टेंसिंग मतलब 3-6 फीट या 1-2 मीटर की दूरी का पालन करना.


    2.  सार्वजनिक वाहन जैसे- टैक्सी, बस या ट्रेन के साथ शेयर राइड आदि को बाय-बाय कहें या करें।


    3.  भीड़भाड़ वाली जगहों जैसे- शॉपिंग माल, किराना स्टोर, स्कूल, कार्यस्थल, सिनेमा हॉल और मंदिर, मस्जिद व चर्च जैसे धार्मिक स्थलों में जाने से बचें।


    4.  कम से कम 70% वाले या इससे अधिक वाले अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का प्रयोग करें.


    5. सर्जिकल मास्क ही लगाएं और हाथों में सर्जिकल या कपड़े के दस्ताने पहने.


    6.  शारीरिक कसरत के साथ योग करें, विशेषकर श्वसन तंत्र (सांस) का योग करें. इसमें शामिल है- सीढियों से चढ़ना, उतरना के साथ सूर्य नमस्कार करना (ये योग्य योग गुरु के सानिध्य में ही करें)


    7.  बीमार या संक्रमित व्यक्तियों के करीबी संपर्क से बचें


    8.  यदि संक्रमण की चपेट में आ गए हैं तो किसी योग्य चिकित्सक से चिकित्सकीय परामर्श व समाधान कराएं साथ जब तक स्वस्थ्य नहीं होते तब तक खुद को घर में ही क्वारंटाइन (कम से कम 15 दिनों के लिए) कर लें.


    9.  अपने हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह कम से कम 20 सेकेंड तक धोएं, खास तौर पर नाक छूने, खांसने, छींकने और शौचालय के प्रयोग के बाद साथ ही भोजन बनाने व भोजन खाने के पहले।


    10. ऐसे स्थान या जगह, जो आपके संपर्क में ज्यादा से ज्यादा आते हैं, उन स्थानों या जगहों को साफ व स्वच्छ बनाकर रखें और संपर्क में आने से पहले उन स्थानों पर सैनिटाइजर का छिड़काव अवश्य करें.


    11. वाह्य रोग विशेषज्ञ डा0 ए०के० सिंह (संपर्क सूत्र- +91-9569914563) के परामर्श अनुसार- साधारण चाय के स्थान पर अदरक, तुलसी, मुलेठी, काली मिर्च, जराकुश (लेमन ग्रास) और गिलोय का काढ़ा प्रयोग में लें. ये चीजे आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का काम करती हैं.


    12. शराब के सेवन से बचें और 6 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद जरूर लें.


    इम्यूनिटी बूस्ट के लिए खानपान-

    वैश्विक महामारी कोविड-19 (नोवल कोरोना वायरस) के संक्रमण ने न सिर्फ भारत बल्कि पूरे दुनिया के देशों में दहशत का माहौल पैदा कर रखा है। 

    कोविड-19 के संक्रमण को रोकने के लिए तरह-तरह की कोशिशें भी सरकारों और वैज्ञानिकों द्वारा की जा रही हैं। हालांकि कोविड-19 बीमारी के ईलाज के लिए कोई विशेष दवा अभी अपने प्रारम्भिक चरण में है. 

    विशेषज्ञों ने इससे बचने के लिए स्वस्थ्य और संतुलित खानपान से इम्यून सिस्टम को मजबूत करने की सलाह दी है. तो हम अपने भोजन कौन-कौन सी चीजों को शामिल करें, जिससे हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर हो सके-


    फाइबर युक्त खाद्य- 

    अपने इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए हममें से हर एक को अपने भोजन में फाइबर युक्त खाद्यों को शामिल करना ही होगा। फाइबर युक्त भोजन से आपका दिल मजबूत तो रहेगा ही, साथ ही उच्च रक्तचाप (High blood pressure) और स्ट्रोक (Stroke) का खतरा भी कम हो जाएगा। 

    विशेषज्ञों के अनुसार हर एक व्यक्ति को कम से कम 15 ग्राम फाइबर अपने भोजन में जरूर शामिल करना चाहिए। फल, ओट्स, ब्रोकली और दालें भी फाइबर से भरपूर होती हैं, ये सभी आपकी सेहत के लिए जरूर फायदेमंद रहेंगे।


    मौसमी और खट्टे फल- 

    अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए हमें दैनिक खानपान में कुछ खट्टे फल जैसे- नींबू, संतरा, मौसम्मी, अनानास, कच्चे आम की चटनी, आंवला भी जरूर शामिल करना चाहिए। 

    खट्टे फल विटामिन सी के अच्छे स्रोत होते हैं, जो मुक्त मूलक यानी फ्री रेडिकल्स के प्रभाव को कम कर हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।


    पीने वाला पानी- 

    पानी भी हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। पानी की  संतुलित मात्रा के सेवन से हमारे शरीर में मौजूद कई तरह के विषैले तत्व स्वत: ही बाहर निकल जाते हैं। 

    पीने योग्य पानी को सामान्य तापमान या फिर गुनगुना कर ही पिए, यह शरीर के लिए अमृत समान है और पानी शरीर को डिहाइड्रेशन से भी बचाता है। एक स्वस्थ व्यक्ति को प्रत्येक दिन कम से कम 8 गिलास पानी पीना चाहिए. 

    अगर इम्यून सिस्टम की ताकत को बढ़ाना है तो फ्रिज के ठन्डे पानी को अलविदा कह दें, ये ठंडा पानी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।


    नोट- यदि आपके यहाँ Water Purifier लगा है या RO के पानी का इस्तेमाल करते हैं तो इसके पानी का उपयोग करना कम कर दें क्योंकि कुछ वाटर प्यूरीफायर पानी को फिल्टर करने के साथ ही पानी में मौजूद खनिजों को भी फिल्टर कर देता है

    और जब आप इस फिल्टर पानी को पीते हैं तो यह पानी आपके शरीर से खनिजों मिलकर, शरीर से बाहर निकलता है, जिससे धीरे-धीरे शरीर में मौजूद खनिजों की मात्रा कम हो सकती है. इसके स्थान पर आप मिनरल वाटर का उपयोग कर सकते हैं.

    अदरक, हल्दी, दालचीनी, अलसी, तुलसी और लहसुन ये कुछ ऐसे मसाले व औषधियां हैं जो हमारे इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाने में सहायक हैं और यह सभी के किचन में जरूर मौजूद रहती हैं.


    किसी भी वायरस संक्रमण महामारी की अधिकतम अवधि क्या हो सकती है?

    देखिये यह निर्भर करता है कि संक्रमण फैलाने वाले वायरस या विषाणु का जीवन चक्र न्यूनतम कितने दिन का हो सकता है यह एक वैज्ञानिक शोध का विषय है और कई सालों से विशेषज्ञ एवं वैज्ञानिक इस पर शोध कर ही रहे हैं. 

    वायरस! जो बिना कोशिका (अम्ल और प्रोटीन) से बना होता है, जिसे अपना जीवन जीने या जीवित रहने के लिए किसी अन्य जीव की कोशिका पर निर्भर रहना पड़ता है, 

    अपने जीवन को बचाने के लिए ये वायरस किसी मृत जीव में या फिर किसी निर्जीव जगह में हजारों साल तक बने रह सकते हैं, साथ ही जीवन बचाने का निरंतर प्रयास करते रहते हैं, और इसका प्रमाण आपके सामने है- नोवल कोरोना वायरस (COVID-19)

    विशेषज्ञों के अनुसार वायरस या विषाणु तब तक सुप्त अवस्था में रहता है जब तक कोई मेजबान या जीवित कोशिका उसके संपर्क में नहीं आती, जैसे ही कोई मेजबान इसके संपर्क में आता है ये वायरसस खुद को सक्रीय कर देते हैं 

    और अपना विस्तार करना शुरू कर देते हैं. हालांकि इन वायरसों के हमले पर हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता डट कर सामना करती है लेकिन यदि immune system कमजोर होगा तो ये वायरस मेजबान के शरीर को रोगग्रस्त बनाकर उसका जीवन समाप्त करने की क्षमता भी रखते हैं. कोरोना वायरस ने हम सभी के सामने यह उदाहरण प्रस्तुत किया है.


    मन के हारे हार, मन के जीते जीतएक सकारात्मक मनोवैज्ञानिक विश्लेषण-

    पिछले साल 2020 में कोविड-19 जैसी बीमारी ने हमारे देश भारत में अपने पैर पसारे थे, जिसे वैश्विक महामारी (जो कि छूने से फैलती है) भी घोषित किया जा चुका है, ने हमारे देश भारत में अपना प्रकोप बरपाना शुरू किया था 

    और आज तक इस वैश्विक महामारी ने भारत सहित पूरी दुनिया में दहशत का माहौल बनाकर रखा है, आए दिन न्यूज चैनलों, समाचार पत्रों और सोशल मीडिया पर मन को विचलित करने वाली ख़बरें दिखतीं और सुनाई पड़ती ही रहती हैं. 

    जो कि हमारे मन मस्तिष्क के विचारों को झकझोर कर रख देती है और इन खबरों से महसूस होता है कि पूरी मानव जाति का अस्तित्व अब जल्द ही समाप्त होने वाला है.

    इस संबंध में मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञों का कहना है किकोई भी बीमारी इंसान की इच्छाशक्ति से बड़ी नहीं होती”, हां ये बात सत्य है कि थोड़ा समय जरूर लग सकता है किसी चीज को समझने में क्योकि समझने की प्रक्रिया अनुभव पर निर्भर करती है. 

    मजबूत इच्छाशक्ति से बड़ी से बड़ी बीमारी यहां तक कि मृत्यु को भी धराशायी या टाला जा सकता है. मशहूर वैज्ञानिक स्टीफन विलियम हॉकिंग का नाम आपने सुना ही होगा, जिन्होंने खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष में मौजूद ब्लैक होल को समझने में अपना पूरा जीवन लगा दिया और मानव जाति के लिए ब्रह्मांड के नए पैमाने तय किये

    क्या आप जानते हैं कि सर स्टीफन विलियम हॉकिंग को एक जानलेवा और ला-ईलाज बीमारी amyotrophic lateral sclerosis (ALS) होने के बावजूद भी उन्होंने 76 वर्ष का शानदार जीवन जिया.  

    दृढ़ इच्छाशक्ति और सकारात्मक विचारों के पक्के स्टीफन हॉकिंग ने शारीरिक समस्या को दरकिनार कर अपने वैज्ञानिक बनने के सपने को पूरा किया। 

    इससे साबित होता है कि हम अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और सकारात्मक विचारों से किसी को भी हराकर कुछ भी हासिल कर सकते हैं, फिर ये कोरोना वायरस (कोविड-19) मात्र एक छोटी सी बीमारी ही तो है.

    वो कहते हैं न “मन के हारे हार, मन के जीते जीत" अपनी आँखों और कानो को विचलित करने वाली ख़बरों से बचाएं साथ ही एक सकारात्मक प्रेरणा से अपने मन मस्तिष्क को प्रेरित करने का प्रयास करें,

    एक सकारात्मक विचारधारा का विकास करने की कोशिश करें. इससे कोरोना क्या आपकी कई समस्याएं आसानी से हल होती चली जाएगी. जीवन आपका है और चुनाव भी आपका ही होना चाहिए "कोविड से हारना है या कोविड को हराना है".


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    अंत में-

    अंत में यही कहना है कि सतर्कता ही समाधान है, मतलब सावधानी हटी दुर्घटना घटी" अपने आपको सुरक्षित रखें, सरकार द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों का पालन अनिवार्यता से करें


    मास्क पहने और हैंडसेनीटाईजर का उपयोग करें, अपने खानपान के साथ सेहत का अच्छे से ध्यान रखें, और अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) को मजबूत बनाने की कोशिश करते रहें. 

     

    नोट- इस लेख में उपाय व लक्षण चिकित्सकों व विशेषज्ञों द्वारा बताए गए हैं, दिए गए उपायों को अपनाने से पहले अपने चिकित्सक की सलाह जरूर ले लें.


    आशा है इस लेख रोग प्रतिरोधक क्षमता को कैसे मजबूत बनाएं?” से आपको कुछ महत्वपूर्ण जानकारी जरूर मिली होगी. ऐसी और जागरूकता, मनोविज्ञान और अंतरिक्ष संबंधी लेखों और तथ्यों को पढ़ने/जानने के लिए वेबसाइट को subscribe करें. 

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