दिमाग हैरान करने वाले रोचक तथ्य | Interesting Facts of Mind

दिमाग हैरान करने वाले रोचक तथ्य (Interesting Facts of Mind)-

हमारा दिमाग हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग या भाग होता है। जिसे अभी तक पूरी तरह से समझा नहीं जा सका है, वैज्ञानिक हमेशा हमारे दिमाग को समझने के लिए नई-नई तरकीबें खोजते और विकसित करते ही रहते हैं, लेकिन कभी कभी हमें दिमाग के कुछ ऐसे तथ्य देखने और समझने में मिल जाते हैं

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दिमाग हैरान करने वाले रोचक तथ्य | Interesting Facts of Mind

जो पूरी तरह से हैरान कर देते हैं। आज हम इस लेख "दिमाग हैरान करने वाले रोचक तथ्य" के माध्यम से हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंग के बारे में कुछ ऐसे तथ्य साझा करने कि कोशिश करेंगे जो आपको पूरी तरह से सच में हैरान कर सकते हैं। तो बिना समय गंवाए चलिये शुरू करते हैं-

    आई.क्यू. (I.Q.)-

    आपने आई.क्यू. (I.Q.) जैसा शब्द तो सुना ही होगा। लेकिन क्या आपको पता है कि आई.क्यू.क्या है? आई.क्यू. (I.Q.) जिसका पूरा नाम Intelligence Quotient (बुद्धिमान भागफल) होता है, हम अपने दैनिक कार्यों को बेहतर और उमदा बनाने लिए नए तरीके खोजते या विकसित करते हैं 


    तो हमारे ऐसा करने से हमारे दिमाग में झुर्रियां पैदा होती रहती हैं जिन्हे साइनैप्स कहा जाता है, यही झुर्रियां ही आई.क्यू. (I.Q.) को नापने का सही पैमाना है। 

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    लक्ष्य निर्धारण करने में समस्या-

    इंटरनेट की बढ़ती पहुंच के कारण आजकल छोटे बच्चों का रुझान स्मार्टफोन, लैपटॉप और कंप्यूटर की ओर बढ़ता जा रहा हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्मार्टफोन, टीवी और कंप्यूटर आदि को देखने में बच्चों का दिमाग बहुत ही कम विकसित (Develop) हो पाता है


    साथ ही अधिक मात्रा में consume किए गए content से मानसिक अवसाद जैसी बीमारियों के पनपने का खतरा भी बढ़ जाता है, जिसके चलते बच्चों और कुछ हद तक युवाओं को भी अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारण करने में समस्याओं का सामना करना पड़ता है।


    लंबे समय तक स्मार्टफोन, टीवी और कंप्यूटर पर काम करते रहने से आपके दिमाग में ट्यूमर होने का खतरा बढ़ जाता है। मैं यह बिल्कुल नहीं चाहता कि आप या बच्चे स्मार्टफोन, लैपटॉप और कंप्यूटर चलाना छोड़ दे। लेकिन किसी भी चीज को उपयोग करने की एक सीमा/लिमिट होती है, बाकी आप समझदार हो। 


    यदि आप अपनी व बच्चों की दिमागी क्षमता बढ़ाना चाहते हैं तो थोड़ा बाहरी खेल-कूद के साथ शतरंज और कैरम आदि खेलें, इसले अलावा किताबों से दोस्ती करें, किताबें पढ़ें और पढ़ाएँ क्योंकि किताबें पढ़ने से हमारे दिमाग में एक कल्पना शक्ति का विकास होता है। 

    दिमाग भी बूढ़ा हो जाता है-

    हममें से कुछ लोग कहते हैं कि जब हम बूढ़े हो जाते हैं तो हमारा दिमाग भी बूढ़ा हो जाता है। लेकिन यह पूरी तरह से सच नहीं है क्योंकि लगभग 24 साल की उम्र से ही हमारा दिमाग धीमा होने लगता है लेकिन हमारी उम्र बढ़ने के साथ हमारा दिमाग डिवेलप भी हो जाता है,

     

    साथ ही जैसे-जैसे हमारा अनुभव बढ़ता है, हमारा दिमाग नई नई तकनीक और योग्यताओं को हासिल करता जाता है। इतना ही नहीं बल्कि हमारा दिमाग अनुभव के आधार पर नई चीज़ों को सीखने के लिए हमेशा तैयार रहता है। साधारण तथ्य है लेकिन हैरान कर देने वाला तथ्य है।

    दिमाग की मेमोरी पावर-

    क्या आप यह जानते हैं कि हर एक दिन में हमारे दिमाग में लगभग 50 से 70,000 विचार आते हैं, लेकिन इसमें से 70% विचार नकारात्मक, 29% सकारात्मक और शेष 01% Unknown या समझ के बाहर के होते हैं। दिमाग की मेमोरी पावर के संबंध में वैज्ञानिकों का कहना है कि इंसानी दिमाग में मेमोरी पावर और थिंकिंग पावर (सोचने की क्षमता) की कोई सीमा नहीं होती। 

     

    ऐसा इसलिए क्योंकि इंसानी दिमाग नई-नई सूचनाओं को एकत्र करने के लिए पिछली यादों को समय बीतने के साथ भूलाता जाता है। हम अपने दिमाग की मेमोरी को कभी भी फुल नहीं कर सकते, जिसके आधार पर कहा जा सकता है कि हमारे इंसानी दिमाग की मेमोरी पावर अनलिमिटेड है। 

     

    एक रिसर्च के अनुसार हमारी मेमोरी सुबह 8:00 बजे से 12:00 बजे तक सबसे अच्छी तरह से काम करती है और रात में 9:00 के बाद अच्छा काम करती है। मतलब आफ्टरनून में हमारी मेमोरी सबसे ज्यादा स्लो काम करती है। 


    ऐसा इसलिए क्योंकि सुबह जो भी हम देखते, सुनते या सोचते हैं उस सबको प्रोसेस करने में हमारा दिमाग बिजी हो जाता है जिससे कभी कभी हमें दोपहर में नींद या झपकी भी आती है। 

    डर/भय से मुक्ति-

    हममें से लगभग सभी को किसी न किसी चीज से डर या भय जरूर लगता है, डर लगना एक दिमाग की स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन क्या आपको पता है कि डर का भाव हमारे दिमाग के किस अंग से आता है

     

    हमारे दिमाग के प्रमस्तिष्क खंड (cerebral segment) में मेड्यूला (medulla) नामक एक बादाम के आकार की कोशिका होती है जो डर के भाव को उत्पन्न करने के लिए जिम्मेदार मानी जाती है, लेकिन अगर इसको हमारे दिमाग से निकाल दिया जाए तो इंसान के दिमाग से डर हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा

     

    मतलब आपको कभी भी किसी भी चीज से डर नहीं लगेगा। और यह दिमाग का सबसे हैरान कर देने वाला फ़ैक्ट/तथ्य है। आपको किस चीज से डर लगता है कमेन्ट में हमें जरूर बताएं।

    भविष्यवाणी करने की क्षमता-

    चूंकि एक स्वस्थ्य इंसानी दिमाग के पास चीजों को कई पहलुओं पर आँकने की क्षमता होती है इसलिए वैज्ञानिकों का मानना है कि हमारे दिमाग में एक डोपामाइन सिस्टम होता है जो घटने वाली घटनाओं के बारे में दिमाग को सिग्नल भेजता है इन भेजे गए सिग्नलों का आंकलन करने से भविष्य के पूर्वानुमान लगाने व भविष्यवाणी करने की क्षमता भी विकसित की जा सकती है। 

     

    मतलब जिस व्यक्ति के दिमाग में यह डोपामाइन सिस्टम जितना ज्यादा जगह फैला होता है वह इंसान बिल्कुल सही एवं सटीक भविष्यवाणी कर सकता है। मौलिक तौर पर डोपामाइन को सुख का रसायन भी कहा जाता है।

    ऑक्सीजन की जरूरत-

    आज की दौड़भाग भरी जिंदगी में लोग अपनी सांसों पर बहुत ही कम ध्यान देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऑक्सीजन की कमी हमारे दिमाग के काम करने की क्षमता को कम कर सकती है


    निरंतर सांस लेने से हमारे दिमाग में ऑक्सीजन पहुंचती है साथ ही खाने-पीने की चीजों से 25% ग्लूकोस हमारे दिमाग में पहुंचता है। इन दोनों कारकों के कारण ही हमारा दिमाग अपनी पूरी क्षमता के साथ काम करता है। 

     

    इसलिए जब भी समय मिले तो कम से कम 05 से 10 मिनट गहरी सांस लेने की exercise जरूर करें, और खाने में अधिकतर फाइबर वाले अनाज व भोजन का सेवन जरूर करें, ऐसा करने से आपके दिमाग को भरपूर ऑक्सीज़न तो मिलेगी ही साथ ही फाइबर युक्त भोजन से आपका दिमाग मजबूत भी बनेगा।

    सीखने की क्षमता-

    नींद का हमारी सीखने की क्षमता से गहरा नाता है। आज कई स्टूडेंटस स्कूल या कॉलेज एग्जाम की तैयारी के लिए पूरी रात जाग जागकर पढ़ाई करते हैं। लेकिन यह बिल्कुल ही गलत है क्योंकि! नींद का पूरा न होना, हमारी ज्ञान बढ़ाने की कोशिश से गहरा ताल्लुक है। 

     

    भले ही आप सोते वक्त कुछ पढ़ नहीं रहे होते। लेकिन आपका दिमाग सोते वक्त भी क्रियाशील रहता है कुछ सीख रहा होता है। आपका दिमाग आपके लिए रातभर जागकर आपकी समस्याओं का हल ढूंढ रहा होता है। वहीं यदि आप पर्याप्त नहीं सोते तो भले ही आप जितनी कोशिश कर लें, आपकी याददाश्त अच्छी नहीं होगी। 

     

    इसे इस बात से समझ लीजिए कि जब आप अपने मोबाइल फोन को पूरे दिन और पूरी रात चलाते हैं तो आपके फोन व उसकी बैटरी की क्या हालत होती है? ठीक यही स्थिति आपके दिमाग की भी होती है। 

    भूख और गुस्से की भावना-

    आपने कई बार ऐसा महसूस जरूर किया होगा कि जब-जब हमें भूख लगती है या हम भूखे होते हैं और सामने से कोई हमें परेशान कर रहा होता है या हमारा दिमाग खा रहा होता है तो उस समय ऐसा लगता है जो भी चीज हमारे आस-पास है उसे उठाकर सामने वाले के सिर पर दे मारे। 

     

    असल में ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारी भूख और हमारा गुस्सा क्रम विकास का परिणाम है। इस बात का अंदाजा ऐसे लगाया जा सकता है जैसे- आज जिस तरह से पृथ्वी के संसाधन कम हो रहे हैं, जिस कारण कुछ लोगों को भोजन जैसी प्राथमिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा, जिससे उनमें गुस्से की भावना काफी हद तक बढ़ चुकी है।

     

    अंग्रेजी भाषा में भूख और गुस्से के मूल शब्द समानता के आधार पर बनाए गए हैं- Hungry = Angry.


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    पानी का संतुलन-

    हमारा शरीर लगभग 70% पानी से बना है, यदि हम अपने दिमाग को बेहतरीन कार्य क्षमता तक ले जाना चाहते हैं तो पानी के संतुलन पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि हमारा दिमाग शरीर के लगभग 75% पानी से बना होता हैअगर हम कम पानी पीते हैं तो हमारा दिमाग सिकुड़ जाता है साथ ही दिमाग की काम करने की पावर बिल्कुल कम हो जाती है।

     

    दिमाग पर की जाने वाली एक रिसर्च के अनुसार- एक गिलास पानी पीने से हमारा दिमाग सामान्य की अपेक्षा 14% तेजी से काम करता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि प्यास शांत हो जाने पर दिमाग को ध्यान केंद्रित करने में आसानी होती है, जिससे दिमाग के कार्य करने की गति बढ़ जाती है। इसलिए आपसे अनुरोध है कि पर्याप्त पानी जरूर पिए।

    फुसफुसाने की आवाज सुनना-

    कभी-कभी हमें लगता या महसूस होता है कि किसी ने हमारा नाम बुलाया या फिर किसी ने नाम से आवाज लगाई। लेकिन जब हम इसकी inquiry करते या पूछते हैं तो पता चलता है कि किसी ने भी हमें नहीं बुलाया या पुकारा था। स्पेशली जब हम फोन पर बात कर रहे हों या किसी पारिवारिक फंक्शन में हों, तब ऐसा लगता है कि सारी दुनिया हमें बुला रही है 


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    अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो इसमें घबराने वाली बात नहीं है क्योंकि फुसफुसाहट की आवाज सुनाई देना एक स्वस्थ्य दिमाग (Healthy Mind) की पहचान है। अगर आपको भी अपना नाम फुसफुसाहट में सुनाई देता है तो इसका मतलब यह है कि आपका माइंड एक हेल्दी माइंड है। 

    काम में मन ना लगना-

    मनोविज्ञान के अनुसार मूड खराब होना या किसी भी काम में मन का न लगाना यह दर्शाता है कि आप नकारात्मक विचारों से घिर चुके हैं आवश्यकता है इससे छुटकारा पाने की। अगर आपका किसी वजह से मूड खराब हो जाता है या फिर किसी काम में मन नहीं लगा पा रहे हैं तो इसे जल्द से जल्द ठीक करने की जरूरत है। 

     

    मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक यदि आप अपने खराब मूड को अच्छा करना चाहते हैं, तो आपको धीमी आवाज में आवाज रहित (Instrumental) संगीत सुनना चाहिए। वहीं नकारात्मक विचारों को दूर करने के लिए एक सादे पेपर पर 2 से 3 बार लिखकर जला दें, यह तरीका असल में काम करता है। और आपमें एक नई चेतना के विकसित होने की संभावना बढ़ जाती है।


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    कमियों को अनदेखा करना-

    वह कहते हैं ना कि जिसे हम प्यार करते हैं या जिस पर हमारा क्रश है, उसकी सारी कमियों व गलतियों में भी हमें खूबियाँ ही नजर आती है। हमारा दिमाग या माइंड उसकी सारी कमियों को अनदेखा कर देता है


    उसकी सारी खामियां इग्नोर कर देता है और हमें यही विश्वास दिलाने में लग जाता है कि वह इंसान जिसे हम प्यार करते हैं वह बिल्कुल परफेक्ट है। फिर चाहे वह इंसान कैसा भी हो। 

    देर से सोने की आदत-

    जिन लोगों का में रचनात्मकता (Creativity) बहुत ज्यादा होती है, उन्हें सोने में सबसे ज्यादा टाइम लगता है। मतलब ये लोग रात में सोने के बिस्तर पर लेट तो जाते है लेकिन लेटने के बाद भी वह ज्यादा देर तक जागते रहते हैं और सोचते रहते हैं 

     

    ऐसा इसलिए क्योंकि उनका दिमाग/माइंड इतना क्रिएटिव और इतना ज्यादा एक्टिव होता है कि उसे शांत अवस्था (रिलैक्स मोड) तक आने में सामान्य लोगों की अपेक्षा ज्यादा समय लग जाता है। हमारा दिमाग या ब्रेन सोते वक्त भी उतना ही एक्टिव होता है जितना कि जागते वक्त। 

     

    सोने और जागने के बीच हमारा दिमाग अलग-अलग तरीके से काम करता है। जागते वक्त हमारे दिमाग का कॉन्शियस माइंड रहता है और सोने के बाद सबकॉन्शियस माइंड एक्टिव हो जाता है। 


    अगर हम एक सकारात्मक विचार को लेकर सोते हैं तो यह विचार सीधे सबकॉन्शियस माइंड तक पहुंच सकता है, साथ ही यह पॉजिटिव थॉट्स आपके माइंड की सही डिसीजन लेने की अभिव्यक्ति को भी बढ़ा सकता है। साथ ही सबकॉन्शियस माइंड की पावर से आप अपने लक्ष्य को आकर्षित भी कर सकते हैं.

    अंत में-

    हमारा इंसानी दिमाग अब तक की सबसे जटिल संरचनाओं में से एक है, जैसे जैसे वैज्ञानिक दिमाग को समझने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हे कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन भविष्य में ऐसी तकनीक जरूर विकसित कर ली जाएगी, जब हम अपने दिमाग और उसकी कार्य क्षमता को पूरी तरह से समझ कर जीवन को आसान बना पाएंगे। 

     

    तो यह थे दिमाग के हैरान कर देने वाले अजीबोगरीब रोचक तथ्य आशा है कि इस लेख 'दिमाग हैरान करने वाले रोचक तथ्य' से कुछ महत्वपूर्ण जानकारी जरूर मिली होगी, अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे अपने दोस्तो और जरूरतमंदों से साथ शेयर जरूर करें, साथ ही कुछ कहना या बताना चाहते हैं तो कमेंट में लिखें।


    धन्यवाद!
    जय हिंद! जय भारत!

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