सपनों के हैरान कर देने वाले रोचक तथ्य | Interesting facts about Dreams in hindi

सपनों के रोचक तथ्य

शोधकर्ता काफी लंबे समय से हमारे अपने सपनों पर बड़े-बड़े अध्ययन करते आ रहे हैं क्योंकि हम इंसान अपने सपनों से इतने प्रभावित व मोहित होते हैं कि हर इंसान की दिली ख्वाइस होती है कि उसका सपना जल्द से जल्द पूरा हो जाए, लेकिन कहीं ना कहीं हम इस बात को जानकर भी नजरअंदाज कर देते हैं कि शायद हमारे सपने हमें कुछ बताना भी चाहते हैं?

कईयों का मनाना है कि हमें जो सपने आते हैं वह बिल्कुल रैंडम या मनगढ़ंत होते हैं लेकिन असल बात तो यह है कि हमारे सपने बिल्कुल भी रेंडम/ मनगढ़ंत नहीं होते. वास्तविकता तो यह है कि हमारे सपने असल में एक गहन अध्ययन का विषय है...

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सपनों के हैरान कर देने वाले रोचक तथ्य | Interesting facts about Dreams in hindi

और जैसे-जैसे हमें अपने सपनों के बारे में जानकारी होगी, उतना ही हम अपनी स्वयं की आत्म जागरूकता को बढ़ाने के लिए उपयोग कर पाएंगे। इसी कारण आज हम अपने सपनों के हैरान कर देने वाले रोचक तथ्यों को समझने की कोशिश करेंगे।

    सपनों का मुख्य उद्देश्य-

    हमारे सपने हमें यह दिखाते या समझाने की कोशिश करते हैं कि हमें अपनी समस्याओं का आंकलन किस ढंग से करना चाहिए क्योंकि हमारे दिमाग के अवचेतन मन/मस्तिष्क का काम होता है की वह हमारे लिए दुनिया का सबसे सटीक निवारण तैयार करे।

    साथ ही हमारा दिमाग हमारे आस-पास होने वाली सभी क्रिया-कलापों और घटनाओं को नोटिस करता रहता है और इन क्रिया-कलापों व घटनाओं को सही तरीके से समझकर अपनी मेमोरी में सुरक्षित कर लेता है. अब प्रश्न उठता है कि हमारे आस-पास होने वाली प्रत्येक क्रिया-कलाप या घटना का हमारे जीवन में क्या मकसद है?

    क्या हमें उस activity या घटना से कोई खतरा या फिर कोई लाभ हो सकता है। इन सबका आंकलन हमारा दिमाग करता रहता है और फिर सपनों के माध्यम से हमें उन चीजों से होने वाले लाभ व खतरों के झिलमिल से चल-चित्र दिखाकर समझाने की कोशिश करता है.

    यही हमारे सपनों का मुख्य उद्देश्य होता है. जब भी हम एक सपना देखते हैं तो हमारा अवचेतन मन (अनकॉन्शियस माइंड-Unconscious mind) हमें यह दिखा रहा होता है कि हमने अपने विचारों और समस्याओं को किस तरह से उलझा रखा है और इन समस्याओं को कैसे सुलझाया जा सकता है या सही करने का तरीका क्या है?

    सपनों को कला की तरह प्रतीकात्मक समझना-

    सपनों को वास्तविक नहीं बल्कि कला की तरह प्रतीकात्मक समझना होता है। ज्यादातर लोग इसे समझने में सबसे ज्यादा गलती करते हैं कि क्योंकि वे अपने सपनों को वास्तविक समझने की कोशिश करने लगते हैं।

    जिन लोगों को अपने सपने में कुछ डरावना दिख जाता है, वे सोचते हैं कि उनके साथ कुछ बुरा होने वाला है और वहीं जिन लोगों को अपने सपने में खुशी या वह इंसान दिख जाता है जिन्हें वो पसंद करते हैं, वह भी उसे सच मानकर अपनी कल्पनाओं में खो जाना शुरू कर देते हैं।

    लेकिन असल में हम जब सपने देख रहे होते हैं तो हमारे दिमाग का सबसे आगे वाला तर्क और समझ बोध बनाने वाला हिस्सा बंद होता है और यह इसलिए क्योंकि बिना अपने तार्किक मस्तिष्क (Logical brain) को शांत किए हम हर नए विचार का मूल्यांकन करने लगेंगे और अपने बौद्धिक स्तर के पुराने मॉडल या प्रारूप को अपडेट नहीं कर पाएंगे।

    बिना तार्किक मस्तिष्क की परिसीमा के हमारे दिमाग के पास पूरी छूट होती है कि वह हमें प्रतीक और विचारों की मदद से डोपामीन के डोज को संतुलित कर कुछ ऐसा दिखाये की जो हमें अपने दुनिया के मौजूदा स्तर या मॉडल के बारे में सोचने पर मजबूर करें। 

    यानी हमें अपने सपनों को ऐसे परिभाषित करना चाहिए जैसे कि हम एक पेंटिंग, स्टोरी या मूवी को परिभाषित करते हैं।


    सर्वव्यापक या Universal सपने-

    काफी सारे सपने सर्वव्यापक या Universal होते हैं यानी जहां अधिकतर सपने व्यक्तिगत और अनोखे होते हैं, वही सपनों के कई स्तर ऐसे भी होते हैं जो दुनिया के अलग-अलग समाजों या संस्कृतियों में सामान्य या कॉमन भी होते हैं।

    उदाहरण के तौर पर कहीं से गिरना, किसी खतरनाक चीज से दूर भागना, सांप से लड़ना, हवा में उड़ना, सेक्स की कल्पना, खुद की एक दूसरों की मौत या फिर खुद को पब्लिक में बिना कपड़ों के पाना। 

    यह सारे सपने दुनिया के हर कोने में रहने वाले इंसानों के लिए कॉमन है। इसका कारण! क्योंकि ऐसे सपनों वाले सभी इंसानों की सामान्य सोच परस्पर एक समान होती है। परस्पर एक समान सोच संबंधित प्रतीक और विचार होने के कारण कई संस्कृतियां भी काफी एक समान बन जाती हैं। 

    जैसे अपने आपको पब्लिक में बिना कपड़ों के पाना, हमारे लज्जा का भय (Fear of shame) या फिर फैसले का डर (Fear of judgment) के प्रतीक को निरूपित करता है क्योंकि कपड़े हमारे अनकॉन्शियस माइंड के लिए एक ऐसी चीज है जो हमारी कमियों और कमजोरियों को छुपाती है


    क्या हमारे सपने हमें हमारे भविष्य के बारे में बता सकते हैं-

    क्या हमारे सपने हमें हमारे भविष्य के बारे में बता सकते हैं? जी हां! यहां हम कोई सुपरनैचुरल पावर या ताकत के बारे में बात नहीं कर रहे, बल्कि होता क्या है? जब हम अपने जीवन में किसी चीज को सबकॉन्शियसली गहन समीक्षा करते हैं।

    यानी हमने किसी चीज पर नजरें तो फेर ली लेकिन एकाग्रता की कमी के कारण हम उस चीज पर  जान-बूझकर प्रगति नहीं कर पाए तो उस चीज को हमारा अवचेतन मस्तिष्क, चेतन मस्तिष्क से पहले लेबल कर देता है। 

    जिस कारण कई बार हमें ऐसा लगता है कि हमारा सपना सच हो गया है। लेकिन असल में वह बस हमारी अनभिज्ञता होती है जो हमें ऐसा महसूस कराती है कि जैसे हमने भविष्य देख लिया हो

    उदाहरण के तौर पर अगर आपको तेज गाड़ी चलाने की आदत है और एक रात आपको सपना आता है कि आपका एक्सीडेंट हो गया है और कुछ दिनों बाद आपका असली में उसी जगह पर एक्सीडेंट हो जाता है। जहां पर आपके सपने में हुआ था तो आप बोलोगे कि आपने तो यह चीज पहले ही देख ली थी।

    पर असल में हुआ यह कि आप अपने सपने से जुड़े ड्राइविंग के खतरे को समझ नहीं पाए और आपके अचेतन मस्तिष्क ने आपके सपने का स्वरूप समझ लिया कि आपकी दैनिक दिनचर्या में सबसे खतरनाक हिस्सा कौन-सा है। क्योंकि जिस तरह से आप गाड़ी चलाते हो उस परिस्थिति में आपके साथ क्या हो सकता है?

    हमेशा याद रखिए कि हमारा अवचेतन मस्तिष्क हमारे चेतन मस्तिष्क से कुछ कदम आगे चल रहा होता है तो जिस चीज का आप आज अंदाजा लगाओगे। शायद आपके अवचेतन मस्तिष्क ने कुछ समय पहले ही खोज ली हो।

    सपनों को ज्यादा याद रख पाना-

    रचनात्मक लोगों को ज्यादा सपने आते हैं और तो और वह अपने सपनों को ज्यादा याद भी रख पाते हैं। कई अध्ययनों में यह निरीक्षण किया गया है कि जो व्यक्तित्व काफी गहरे सपने देखने और उन्हें याद रखने से सबसे ज्यादा संबंधित होते हैं, वह अपने अनुभवों के लिए खुलापन चाहते हैं।

    ऐसे लोग ज्यादातर बहुत रचनात्मक और अच्छे विचारों पर मंथन करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। ये अपने सपनों को समझने के लिए लॉजिक नहीं बल्कि सपने में दिखने वाले प्रतीकों और घटनाओं की मदद से सपनों का सारांश प्राप्त करने की कोशिश करते हैं।

    हम यह जानते हैं रचनात्मक लोग जैसे पेंटर, लेखक, दार्शनिक कवि या फिर कोई फिल्म निर्माता ही होते हैं जो किसी भी विषय के सार या शीर्षक को सबसे अच्छे से समझ पाते हैं।

    सपनों में कुछ भी पढ़ पाना असंभव-

    अपने सपनों में कुछ भी पढ़ पाना असंभव है। यह तार्किक मस्तिष्क के शांत रहने का एक और लक्षण है। आप अलग-अलग किताबें या फिर लेख देख सकते हो और उनका मतलब क्या है? वह भी महसूस कर सकते हो।

    पर क्या आप उन्हें कभी भी अपने सपनों में पढ़ा करते हो? तो इसका उत्तर है नहीं! अगर हम विकास के संदर्भ में देखें तो पढ़ना हमारी एक नई योग्यता है जो हमने कुछ हजार साल पहले की विकसित की है।

    और यह योग्यता हमारी विकासवादी जीवन शैली से ज्यादा और कुछ नहीं है जिस कारण सपनों में पढ़ना तो क्या एक शब्द भी देख पाना भी बहुत मुश्किल से हो पाता है। पढ़ाई के बारे में यह रोचक तथ्य थोड़ा अजीब जरूर है लेकिन सच है।

    सपनों को नियंत्रित करना-

    आप अपने सपनों को नियंत्रित भी कर सकते हो। इसके लिए दो तरीके होते हैं एक स्पष्ट अर्थ का सपना (Lucid dreaming) और दूसरा सक्रिय कल्पना (active imagination)। परन्तु सबसे पहले हमेशा यह ध्यान में रखो कि जब भी एक जगह पर नियंत्रण अर्थात Control शब्द आ जाए तो वहां पर हम चेतन मस्तिष्क की पावर की बात कर रहे होते हैं।

    हमारे दिमाग का सिर्फ यही हिस्सा ऐसा होता है जो समय को समझता है और उसके आधार पर निर्णय ले पाता है। जब हम अपने सपनों को नियंत्रण अर्थात Control करने की बात कर रहे होते हैं

    तब हम साधारणतः यह बस बोल ही रहे होते हैं कि हम अपने चेतन मस्तिष्क और अवचेतन मस्तिष्क को साथ में उपयोग करना चाहते हैं। जिससे कि हम अपनी मर्जी से अपने अवचेतन मस्तिष्क में जाकर जरूरी अन्तर्दृष्टि को बाहर ला सकें।

    वहीं दूसरी तरफ सक्रिय कल्पना एक तरह की ध्यान तकनीक है जिसमें ध्यान करते हुए अपने चेतन मस्तिष्क को इस हद तक शांत करने की आदत डालनी होती है कि वह अवचेतन मस्तिष्क से निकलते विचारों के बीच व्यवधान उत्पन्न न कर पाए।

    साथ ही साथ हम इस चीज पर नियंत्रण अर्थात Control भी कर पाए कि हमें अपने अवचेतन मस्तिष्क से निकालना क्या है?

    हमारे सपने नए अंश नहीं निर्मित कर सकते-

    आप अपने सपनों में सिर्फ उन चेहरों को ही देख सकते हो जिन्हें आपने वास्तविक जीवन में देखा हुआ है। मतलब हमारे सपने नए अंश नहीं निर्मित कर सकते। जो लोग आपको अपने सपनों में देखते हैं। चाहे आप उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानते भी न हो।

    उनके अंश आपने सबकॉन्शियसली याद करे हुए होते हैं। हमारी आंखें हर समय बहुत सी ऐसी चीजों को देख रही होती हैं, जिन पर हमारा चेतन मस्तिष्क ध्यान ही नहीं दे रहा होता। जिसकी वजह से हर अंश या वस्तु जिन्हें हम यूं ही सड़क पर चलते हुए देखते हैं।

    हर वो इंसान जिसे हम अपने पूरे जीवन में सिर्फ एक ही बार मिले थे, वह भी हमारी अवचेतन मस्तिष्क की स्मृति का अंश बन जाता है। कई बार हमारा दिमाग इन अनजान इंसानों के अंशों का उपयोग भी हमारी आवश्यकता के अनुसार कर लेता है।

    सपने तथ्यों पर नहीं बल्कि रूपकों या लक्षणों और अनुमान पर चलते हैं। यानी अगर दो या दो से ज्यादा चीजें एक दूसरे के समान हैं तो हमारे अवचेतन मस्तिष्क के लिए एकदम समान होंगी और उन पर एक ही लेबल लगेगा।

    अंत में-

    तो दोस्तों ये थे कुछ सपनों के बारे में हैरान कर देने वाले अजीबोगरीब रोचक तथ्य. आशा है आपको यह सपनों के हैरान कर देने वाले रोचक तथ्य लेख जरूर पसंद आया होगा. ऐसे ही रोचक तथ्य और मनोवैज्ञानिक विश्लेषण आपको आगे भी मिलते रहें तो उसके लिए हमारी वेबसाइट की सदस्यता जरूर लें। लेख पसंद आई हो तो अपने दोस्तों में share करना न भूलें। अभी तक के लिए इतना ही....

    धन्यवाद!
    जय हिन्द! जय भारत!

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