हमारी एकाग्रता | Our Concentration

लक्ष्य प्राप्ति और बेहतर ध्यान ही किसी के भी जीवन को आसान और सफ़ल बनाने के सबसे ज़रूरी युक्ति हैं. खासकर उन विद्यार्थियों और उन इच्छुक उम्मीदवारों के लिए पूर्ण एकाग्रता सफ़लता की वो कुंजी है जिसकी मदद से वे किसी भी परीक्षा में मनचाहा परिणाम पा सकते हैं.

लेकिन लगातार बदलते परिवेश के कारण हममें से अधिकतर को किसी ख़ास चीज पर अधिक समय तक एकाग्र करने के लिए अपनी दिमागी शक्ति को नियंत्रण करने में काफी अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है क्योंकि हम इंसानों का दिमाग (मस्तिष्क) अपने आस-पास होने/घटने वाली गतिविधियों को जल्द और आसानी से नजरअंदाज नहीं कर पाता.

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हमारी एकाग्रता | Our Concentration

यही कारण है कि जब आप किसी वस्तु पर अपना ध्यान एकाग्रचित करने में सक्षम नहीं हो पाते हैं तो परिणाम स्वरूप आपको सभी आसान काम भी मुश्किल लगने लगता है, भले ही वो काम वास्तविकता में बहुत ही आसान ही क्यों न हो और यदि आप उस काम को सम्पन्न करने की कोशिश करते हैं तो आपको सामान्य से अधिक समय लग जाता है.

तो यहां पर प्रश्न उठता है कि हमारी एकाग्रता को नियंत्रित कौन करता है? हमारी एकाग्रता से संबंधित ऐसे ही कुछ प्रश्नों का उत्तर आज इस पोस्ट के माध्यम से खोजने की कोशिश करेंगे. तो चलिए शुरू करते हैं-

    एकाग्रता की परिभाषा (concentration definition)-

    किसी विशेष उद्देश्य/लक्ष्य प्राप्ति के लिए बाकी अन्य बातों, विषयों और तथ्यों पर ध्यान न लगाते हुए एक ही चीज पर ध्यान केन्द्रित करना ही एकाग्रता है. साधारण शब्दों में एक ही लक्ष्य पर केन्द्रित होना ही एकाग्रता है.


    हमारी एकाग्रता कहां से नियंत्रित होती है-

    पृथ्वी पर एकछत्र राज करने वाली एक मात्र प्रजाति हम इंसान जो पूरी तरह से भावनात्मक प्राणी हैं और अपने अस्तित्व का विस्तार करने के लिए अपने शरीर के एक विशेष अंग दिमाग को सबसे बड़ी मात्रा में प्रयोग में लेते हैं.

    दिमाग जो आज भी हम इंसानों के लिए मात्र एक पहेली ही है, क्योंकि इसको विकसित होने लाखों साल लगे हैं, जिसका नतीजा यह है आज हम ऐसे कामों को अंजाम देने में सक्षम हैं, जिनकी सदियों पहले कल्पना भी नहीं की गई थी. यह अंजाम सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के भी हो सकते हैं.

    यहाँ समझने वाली बात यह है कि मैंने अंजाम शब्द का इस्तेमाल किया है मतलब अंजाम पर पहुचने से पहले एक विचार पनपा होगा, फिर इस विचार पर मंथन किया गया होगा, इसके बाद अंजाम देने की रूपरेखा तैयार की गई होगी, फिर यदि संभव हो तो तैयार रूपरेखा को आजमाया गया हो, इन सब पड़ावों को पार कर ही उस वांछित कार्य को अंजाम तक सफलता से पहुचाया गया.

    इस सब तथ्यों पर गौर करने से आपको महसूस होगा कि आपका ध्यान एक ही स्थान पर एकाग्र हो चुका है. इसका कारण यह है कि जब आप किसी प्रणाली को समझते या किसी समस्या से जूझते अथवा समाधान ढूंढने की कोशिश करते हैं तो आपको या यूं कहें कि दिमाग को एक अलग ही आनंद आने लगता है. 

    वहीं जब हम उस प्रणाली को समझ या समस्या को सुलझा लेते हैं तो हमारा दिमाग फिर से ऐसी नई चीजों को खोजने का प्रयास करता है, जिससे फिर से एकाग्रता पाई जा सके और कुछ नया सीखा जा सके. यहां पर मैंने concentration exercises के एक पहलू को रखा है.

    हम इंसानों में होने वाली यह मानसिक क्रियाएँ बहुत से विचारों से उत्पन्न और बहुत से हॉर्मोन्स (Hormones) द्वारा नियंत्रित की जाती है. जिनमें से कुछ महत्वपूर्ण हॉर्मोन्स के बारे में चर्चा करेंगे, जो हमारी एकाग्रता और सीखने की क्षमता को सबसे अधिक प्रभावित करते हैं-


    डोपामाइन हार्मोन (Dopamine Hormone)-

    डोपामाइन, जिसे आमतौर पर सुख या ख़ुशी का हॉर्मोन (Pleasure Hormone) भी कहा जाता है, असल में जब हम किसी काम को सफलतापूर्वक संपन्न करते हैं तो उस काम को समाप्त करने पर हमें जो सुख या ख़ुशी प्राप्त होती है वह डोपामाइन हार्मोन के कारण ही प्राप्त होती है.

    डोपामाइन एक ऐसा हार्मोन है जो हमें सफलता हांसिल करने के लिए मानसिक एकाग्रता और काम को जल्दी समाप्त करने के लिए प्रेरणा देता है. वैज्ञानिको के अनुसार डोपामाइन हार्मोन एक तरह का न्यूरोहार्मोन है जिसका काम मुख्य रूप से ध्यान, एकाग्रता और मानसिक गतिविधियों व क्रियाकलापों के लिए प्रेरणा देना होता है.

    हमारा दिमाग प्राकृतिक रूप से डोपामाइन हार्मोन का निर्माण करता है. शरीर में डोपामाइन हार्मोन की कमी होने पर थकावट महसूस होना, ध्यान लगाने में समस्या, एकाग्रता में कमी और भूलना आदि समस्याओं के लक्षण दिखाई देते हैं.


    ख़ुशी पाने की लालसा-

    आज के समय में ऐसा कोई भी इंसान नहीं होगा जिसे सुख या ख़ुशी पाने की लालसा न हो, सभी को ख़ुशी चाहिए, बल्कि ख़ुशी बस चाहिए ही नहीं अपितु कई लोग कभी-कभी ख़ुशी पाने (डोपामाइन उत्पादन) के लिए नाजायज तरीके भी अपनाते हैं. जैसे- आपने ऐसे व्यक्तियों को जरूर देखा होगा जो अपनी धुन के पक्के और उसमें ही हमेशा रमे रहते हैं.

    यदि उसका मकसद सकारात्मक और कल्याणकारी है तो ठीक, लेकिन यदि उसका मकसद क्षति पहुचाने का है तो यह अभिशाप है. यह क्षति व्यक्तिगत और सामाजिक दोनों तरह की हो सकती है. मसलन आज कई लोग पहले शौकिया तौर पर किसी नशे को करना शुरू करते है, जो धीरे-धीरे आदत में और फिर वह उस नशे के आदि हो जाते हैं.

    हमारे द्वारा किये गए एक छोटे से प्रयोग में कुछ ऐसे लोगों का चुनाव किया गया, जो ख़ुशी पाने के लिए मादक पदार्थों का सेवन करना पसंद करते हैं, उनसे पूंछा गया कि----

    प्रश्न- आखिर क्षमता से अधिक नशा करने से उनको क्या मिलता है?
    उत्तर- इस पर उन सभी का कहना था कि उन्हें परम सुख और शांति महसूस होती है.

    प्रश्न- अधिक मादक पदार्थ लेने से उनका शरीर में विकार उत्पन्न हो सकता है?
    उत्तर- इस पर उन सभी का कहना था एक न एक दिन सबको मरना ही है तो क्यों न सुख प्राप्त करके ही मरा जाए.

    अब जब कोई इस तरह से जवाब दे तो आप कैसे कोई प्रतिक्रिया दे सकते हैं. खैर यह एक अलग विषय है और भविष्य में फिर कभी इस पर चर्चा करेंगे. परन्तु कुछ ऐसा मादक पदार्थ है जिस पर कंट्रोल किया जाना जरूरी है और जो आज लगभग सभी की पहुंच में भी हैं-


    Caffeine और Nicotine का कम सेवन:

    कई बार जब विद्यार्थी या अन्य लोग दिमागी तौर पर थकान महसूस करते हैं तो अपनी क्रियाशीलता (प्रोडक्टिविटी) बढ़ाने के लिए अक्सर चाय या कॉफ़ी का इस्तेमाल करते हैं. 

    इसका असर भी तुरंत दिखने लगता है क्योंकि चाय में nicotine और कॉफ़ी में caffeine नाम का रसायन (आंशिक मात्रा में) पाया जाता है, जो क्रियाशीलता बढ़ाने वाले हार्मोन डोपामाइन के रिसाव में वृद्धि करता है.

    हमारे ऐसा करने से प्राकृतिक डोपामाइन रिसाव प्रक्रिया बुरी तरह से प्रभावित होती है. इससे हमारा नर्वस सिस्टम भी बुरी तरह से प्रभावित होता है. अत: यदि आप Caffeine और Nicotine के सेवन को कर रहे हैं तो इसे कम मात्रा में ही करें. 

    मेरे सुझाव से यदि आप इनका सेवन छोड़ दें तो सबसे उत्तम है. यदि आप छोड़ देते हैं तो आपके दिमाग की चीजों को समझने की क्षमता पूर्ण रूप से विकसित होने की सम्भावना को दृणता मिलती है.


    डोपामाइन को संतुलित करना-

    ख़ुशी के हार्मोन डोपामाइन को आसानी से संतुलित किया जा सकता है. असल में इस हार्मोन को संतुलित करने के लिए हमें अपनी खुराक और अपनी मानसिक गतिविधियों पर थोड़ा ध्यान देने की जरूरत है. जैसे-

    • नियमित कसरत डोपामाइन की मात्रा बढ़ाने व संतुलित करने के लिए सबसे बेहतरीन विकल्प माना जाता है. कसरत करने से जहां एक तरफ शरीर मजबूत और हस्ट-पुष्ट बनता ही है वहीं दूसरी तरफ चिंता और तनाव जैसे भाव भी कम होते हैं, जिससे हमारे अन्दर उच्च ध्यान लगाने की  एकाग्रता में सुधार आता है साथ ही हमारे आकर्षण में भी वृद्धि होती है.

    • ध्यान लगाने की प्रक्रिया (मेडिटेशन) भी एक कारगर तकनीक है. असल में मेडिटेशन करने से एक तरफ जहां तनाव से निजात पाने में काफी मदद मिलती है, वहीं दूसरी तरफ शरीर में डोपामाइन की मात्रा बढ़ती है, जो हमारे अन्दर कुशाग्र ध्यान और निर्भीक एकाग्रता बढ़ाने में मदद करता  है.
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    हमारी एकाग्रता | Our Concentration

    • प्राकृतिक संगीत भी हमारी एकाग्रता और ध्यान को बढ़ाने में सबसे अहम भूमिका निभाता है. असल में प्रकृति की हर वस्तु में अपना संगीत और लय है. यदि आप सामान्य से ख़ास होना चाहते हैं तो प्रकृति में मौजूद चीजों के पैटर्न समझने और परखने की कोशिश जरूर करें. यह आपके अन्दर एक नए रोमांच की ओर ले जा सकता है, और आपको एक अलग तरह की ख़ुशी भी मिल सकती है.

    • हमारी नींद भी हमारे ख़ुशी के हार्मोन को बढ़ाने और संतुलित करने का काम करती है. पर्याप्त मात्रा में ली गई नींद से हम हर तरह के तनाव को आसानी से दूर कर सकते हैं.
    • हम अपनी रोजाना खुराक में कम से कम 02 भीगे बादाम, 03 केले, 01 अंडा, 01 गिलास दूध और प्रोटीन के लिए दालें व सप्ताह में एक बार मछली आदि जैसे भोज्य पदार्थों को शामिल करना जरूरी है. असल में इन भोज्य पदार्थों में Tyrosine की भरपूर मात्रा पाई जाती है जो एक प्रकार का अमीनो एसिड (amino acid) है और डोपामाइन के रिसाव में मुख्य काम करता है.


    टायरोसिन क्या होता है (What is Tyrosine)-

    टायरोसिन मानव शरीर के सभी ऊतकों और शरीर के अधिकांश तरल पदार्थों में होता है। यह शरीर में प्रोटीन, एंजाइम तथा थायराइड हार्मोन बनाने में मदद करता है और त्वचा को रंग (pigment) प्रदान करने वाले मेलेनिन का भी उत्पादन करता है साथ ही यह शरीर के न्यूरोट्रांसमीटर बनाने में भी मदद करता है जो दिमाग और तंत्रिका कोशिकाओं के बीच कम्यूनिकेट करने के एक जरूरी घटक है.


    दरअसल, तनावमुक्त होने के लिए की जाने वाली हर वो क्रिया जो हम करते हैं, हमारे Pleasure Hormone डोपामाइन हार्मोन के रिसाव में मदद करती है. इसके अलावा कुछ और हार्मोन हैं जो हमारी एकाग्रता बढ़ाने में सहायक की भूमिका निभाते हैं. यह हार्मोन्स हैं-

    1. थाइरोइड हार्मोन (Thyroid Hormone)
    2. ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन (Human Growth Hormone) आदि

    एक हार्मोन ऐसा भी है जो हमारी एकाग्रता को भंग करने का काम करता है और वह है- कोर्टिसोल (Cortisol) हार्मोन, जिसे आमतौर पर तनाव के हार्मोन के नाम से भी जाना जाता है. 

    कोर्टिसोल (Cortisol) हमारे शरीर में वृक्क (गुर्दे) के ऊपर स्थित ग्रंथि एड्रिनल ग्रंथि से निकलता है. यह हमारी स्मरण शक्ति को नुकसान पहुचाने या तनाव देने का काम करता है.

    असल में कोर्टिसोल हार्मोन हमारे गुर्दे को खून में शुगर प्रवाहित करने के लिए सक्रिय करने का काम करता है. जब हम तनाव में होते हैं तो कॉर्टिसॉल का लेवल हमारे खून में बढ़ने लगता है, बढ़ा हुआ कॉर्टिसॉल का स्तर हमारे दिमाग पर गहरा आघात पहुचता है, 

    हमारी स्मरण क्षमता इससे बुरी तरह से प्रभावित होती है. जिससे हममें से कईयों को कोई भी चीज या घटना याद रखने में समस्या आती है और साथ ही किसी भी चीज या अपने लक्ष्य पर ध्यान एकाग्रचित करने में भी कई दिक्कतोंका सामना करना पड़ता है.


    Neuro-transmitter क्या है-

    हमारा दिमाग (brain) एक खास तरह की कोशिकाओं से मिलकर बना होता है, वैज्ञानिक भाषा में इस कोशिकाओं को न्यूरॉन कोशिका (neuron cells) कहते हैं. हमारे दिमाग में करीब 100 billion neuron सेल्स होते हैं, और किसी भी signal को एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन तक पहुचने में 01 नैनो सेकेंड से भी कम समय लगता है.

    दो न्यूरॉनों के बीच में जो खाली स्थान (Gap) होता है, उसे synapse कहते हैं और signal को एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन तक पहुचने की प्रक्रिया Neuro-transmitter कहलाती है. Dopamine हमारे दिमागी और physical दोनों forms को कंट्रोल करता है. जैसे- Movement, Motivation और Memory...

    जब हम अचानक surprise, ज्यादा मात्रा में जोखिम भरी चीजें या डेली रूटीन में कसरत आदि को करते हैं तो dopamine का स्तर हमारे शरीर मे बढ़ जाता है, और यह बढ़ा हुआ डोपामाइन ही हमारे ध्यान और हमारी एकाग्रता को बढ़ा देता है, जिससे हमारे अन्दर एक नया रोमांच पनपता है और हम अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर हो जाते हैं.


    अंत में-

    आशा है आपको हमारी एकग्रता से सम्बंधित कई तथ्यों की जानकारी जरूर मिली होगी. आज की पोस्ट में बस इतना ही... यदि कुछ कहना या पूछना चाहते हैं तो comment में लिखें, साथ ही पोस्ट अच्छी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों और जरूरत मंद लेगों के साथ share करना न भूलें.

    धन्यवाद!

    जय हिंद! जय भारत!

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