आदतें जो दिमाग को नुकसान पहुंचाती हैं | Habits that Damage Brain

हमारा मस्तिष्क/दिमाग हमारे शरीर द्वारा की सभी गतिविधियों को नियंत्रित करता है। मसलन हमारे सांस लेने की प्रक्रिया, हमारे दिल धड़कन की प्रक्रिया जो हमें जीवित रखने के लिए सबसे ज्यादा जरूर है. का नियंत्रण भी हमारे दिमाग के पास ही होता है,  


साधारण शब्दों में यह कहना बिल्कुल सटीक है कि आज हमारे जीवन और हमारे स्वभाव की प्रत्येक गतिविधि का नियंत्रण हमारे दिमाग द्वारा ही किया जाता है.


हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग होने के बावजूद भी हममें से अधिकांश लोग प्रतिदिन (दैनिक स्तर पर) अपने मस्तिष्क/दिमाग को हानि पहुँचाने से चूकते नहीं, और सबसे ख़ास बात यह कि हममें से अधिकांश लोगों को लम्बे समय तक इसके बारे में पता भी नहीं चलता. 

 

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आदतें जो दिमाग को नुकसान पहुंचाती हैं | Habits that Damage Brain


इस पोस्ट में, हम धूम्रपान या अत्यधिक शराब पीने जैसी दिमाग को हानि पहुचाने वाली गतिविधियों को कवर नहीं करने जा रहे हैं बल्कि उन कुछ सूक्ष्म आदतों के बारे में चर्चा करने जा रहे हैं जो हमारे दिमाग/माइंड को हमारे दैनिक जीवन में नुकसान पहुंचा सकती हैं.

    झक मारना (Do nothing)- 

    अक्सर आपको अपने आस-पास के कई करीबी लोगों खासकर किशोरों/युवाओं से यह जरूर सुनने में मिला होगा कि वे अपने खाली समय में कुछ नहीं (झक मारते) करते हैं. असल में झक मारना! इंसान का एक ऐसा स्वभाव है जिसके तहत मनुष्य को अपने समय की उपयोगिता का भान नहीं होता है और वह अपने अमूल्य समय को निरर्थक व्यतीत कर देता है. 

     

    स्वभाव की यह प्रकृति समय बीत जाने के बाद शारीरिक और मानसिक (दिमागी) दोनों स्तरों पर बेहद ही पीढ़ा दायक होती है. तो इसका समाधान क्या है?

     

    समाधान-

    इसका समाधान बहुत ही सरल है और हर किसी के द्वारा आसानी से किया जा सकता है. समझिये! हमारा दिमाग सोचने और अनुभव प्राप्त करने के लिए विकसित हुआ है, न कि झक मारने (खाली बैठने) के लिए. 

     

    चुनौतियों का सामना करना, नए कौशल विकसित करना, विभिन्न भाषाओं को सीखना, दिलचस्प बातचीत की शुरुआत करना, पढ़ना, सलीके से लिखना, नए अनुभव प्राप्त करना और यहाँ तक कि पहेलियों को सुलझाना. 

     

    सुडोकू जैसी वर्ग पहेलियां हमारे मस्तिष्क को उत्तेजित करने के साथ-साथ हमारे दिमाग के न्यूरॉनस की संख्या को बढ़ाने का काम करती हैं, जो हमारे दिमाग की सीखने की शक्ति को विकसित करने में कारगर सिद्ध होती है, ये गतिविधियां हमारे दिमाग तीव्र करने की क्षमता को रखती हैं और बुद्धि के स्टेमिना पावर को बढ़ाने का काम करती है.

     

    किसी भी मांसपेशी को स्वस्थ्य बनाए रखने के लिए उस मासपेशी को सक्रीय करना आवश्यक होता है ऐसा ही कुछ हमें हमारे दिमाग को सक्रीय करने के लिए व दिमाग को तंदरुस्त बनाने के लिए करना जरूरी होता है. दिमाग को एक मांसपेशी की तरह देखें, यदि आप इसका उपयोग नहीं करते हैं, तो आप दिमाग की शक्ति खो देंगे.

     

    क्या करें:

    शोधों से साबित हो चुका है कि दिमागी कसरत का हमारी संज्ञानात्मक व संदर्भित क्षमताओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। तो किसका इंतज़ार कर रहे हैं आप? खुद से सवाल करें कि आप इस सप्ताह अपने दिमाग को उन्नत बनाने के लिए क्या-क्या करना चाहते हैं.

     

    सुझाव-

    मेरे सुझाव से आप उन विषयों का चुनाव करें जिन पर आपने अभी तक कोई ख़ास तरक्की या कोई खास ज्ञान नहीं लिया है. सबसे पहले आप ऐसे विषयों की किताबों से मित्रता करना मतलब उनको पढना उचित होगा.

     

    जब आप किताबों को पढ़ना शुरू करते हैं तो आपके दिमाग की एकाग्रता बढ़ने लगती है क्योंकि पढ़ना और लिखना एक सक्रीय गतिविधि (Active Activity) और देखना और सुनना एक निष्क्रिय गतिविधि (Passive Activity) है.

     

    भोजन की अनियमितता-

    आधुनिक चिकित्सकों और मनोवैज्ञानिकों के अनुसार अधिकतर यह तर्क दिया जाता है कि भोजन की अनियमितता हमारी दिमागी शक्ति को प्रभावित करता है. मसलन हम जो खाते हैं वह हमारे सोचने के तरीके व क्षमता को अत्यधिक प्रभावित करता है।

     

    कई शोध यह भी साबित करते हैं कि ज्यादा मीठा (उच्च चीनी) या अधिक मात्रा में फैट वाला आहार (जंक फूड) लेना, हमारे दिमाग की गतिविधि को धीमा कर देता है साथ ही हमारी याददाश्त और सीखने की क्षमता में भी बाधा उत्पन्न करता है.

     

    हालाँकि अधिक वसा वाला भोजन लेने से प्राकृतिक रूप से हमारे शरीर अधिक ऊर्जा की महसूस होती है, लेकिन अधिक वसा वाला भोजन लेने से हमारे शरीर का वजन भी बढ़ने लगता है, शरीर का वजन बढ़ने के कारण हमारे दिमाग को शरीर के कुशल संचालन करने में अत्यधिक ऊर्जा की खपत करनी पड़ती है. 

     

    जो दिमाग की क्षमता को भारी मात्रा में नुकसान पहुचाता है. जिससे हमारी सोच और निर्णय लेने की क्षमता पर बड़ा गहरा प्रभाव पड़ता है.

     

    समाधान-

    ज्यादातर उच्च वसा वाले भोजन की आवश्यकता तब होती है जब हम तनाव महसूस करते है और तनावमुक्ति की प्रतिक्रिया के रूप में हम उन खाद्य सामग्रियों का चुनाव करते हैं जो अधिक वसा वाली होती हैं और जिससे हमें अधिक ऊर्जा महसूस होती है. 

     

    असल में अनियमित भोजन शरीर को क्षणिक स्फूर्ति तो प्रदान करता है लेकिन वास्तव में अनियमित आहार (जंक फूड) में पोषक तत्वों की मात्रा का स्तर बहुत ही न्यूनतम होता है. परिणाम में अनियमित आहार लेने से हमारी क्षणिक भूख तो शांत हो जाती परन्तु बहुत जल्द फिर से भूख लगने लगती है.

     

    समस्या यह है कि अनियमित आहार से मिला कुपोषण न केवल हमारे शरीर के अंग जैसे-कमर, रीढ़ और हड्डियों को नुकसान पहुंचाता है बल्कि यह अनियमित आहार हमारे दिमाग के विकास क्षमता को भी धीमा कर देता है।

     

    भले ही हमारा दिमाग हमारे शरीर के वजन का 2% हिस्सा मात्र है, लेकिन पूरा शरीर दिमाग द्वारा ही कंट्रोल किया जाता है. इसलिए अब से आप जो भी भोजन करें, उस भोजन के उपयोगिता को जरूर समझें क्योंकि आपके द्वारा लिया जाने वाला भोजन आपकी सोच, निर्णय क्षमता और आपके इम्यून सिस्टम पर गहरा प्रभाव डालता है.


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    क्या करें:

    ऐसे खाद्य पदार्थों को avoid करने के बजाय, आप इन खाद्य सामग्रियों को उन विकल्पों के साथ बदलने का प्रयास करें जो हमारे शरीर और दिमाग को स्वास्थ्य बनाने के लिए सकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं.

     

    हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, साबुत अनाज और मेवा ये कुछ उदाहरण हैं, जिन्हें आपको अपने भोजन में शामिल करने की आवश्यकता है. जब भी संभव हो, पौष्टिक सब्जियों और उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन स्रोतों से युक्त संपूर्ण भोजन का ही चुनाव करें.

     

    आप अपने चाय-कॉफी को मीठा करने के लिए साधारण चीनी के स्थान पर डार्क चॉकलेट या पारंपरिक तरीके से बने गुड़ के एक टुकडे का उपयोग करें. पारंपरिक गुड़ तो गुणों की खान है और हमारे शरीर और दिमाग दोनों के लिए अच्छा भी होता है, और इसे आप आसानी से अपना भी सकते हैं.

     

    इसके अलावा, स्वस्थ दिमाग पाने के लिए प्रोटीन और ओमेगा युक्त खाद्य पदार्थ जैसे नट, दाल और बीज में कटौती न करें। चिकित्सा अध्ययन के अनुसार, उच्च वसा भोजन लेने से होने वाले नुकसानों को ओमेगा-3 फैटी एसिड से  कम करने में मदद मिल सकती है. 

     

    साथ ही दिमाग की तंदरुस्ती के लिए हमें पीने वाले पानी की पर्याप्त मात्रा को सुनिश्चित करना आवश्यक है, क्योंकि हमारे शरीर के लगभग 70% भाग तरल ही होता है.

     

    आभासी दुनिया में रिश्तों को खोजना-

    जब से इन्टरनेट में क्रांति हुई है जिसने लगभग पूरी दुनिया को सबसे ज्यादा प्रभवित किया है या यूं कहे कि दुनिया को पूरी तरह से बदल दिया है. यहां बात की जा रही है- सोशल मीडिया जैसे- फेसबुक, इन्स्टाग्राम, ट्विटर, वास्ट्सएप्प और कई अन्य. 

     

    जहां हममें से अधिकांश सोशल मीडिया पर प्रसारित तस्वीरों, वीडियो व बातों जैसे कंटेंट से प्रभावित होकर अपनी एक अलग ही दुनिया में रहते या रहना पसंद करते हैं.

     

    किसी भी तरह की सोशल मीडिया एप्प या वेबसाइट का हद से ज्यादा उपयोग दिमाग को बहुत ही गहरा आघात पहुचाने का काम करता है, क्योंकि मौजूदा समय में सोशल मीडिया पर उपलब्ध होना वाला कंटेंट उसे उपयोग करने वाले उपभोक्ता को addicted बनाता है.

     

    हार्वर्ड स्टडी ऑफ एडल्ट डेवलपमेंट के अनुसार, वास्तविक रिश्ते हमें खुशी प्रदान करने के साथ-साथ हमें स्वस्थ बनाए रखने के लिए भी जरूरी होते हैं. वास्तविक रिश्ते इस लिए भी जरूरी होते हैं क्योंकि... 

     

    हम इंसान मूल रूप से भावनात्मक प्राणी मात्र ही तो हैं और भावना वास्तविकता में प्रकट की जा सकती है न कि आभासी रूप से. यदि आभासी रूप से कोई भावना को प्रकट करता है तो उसे एक अच्छे अभिनय (Acting) की श्रेणी में रखा जा सकता है.

     

    असल में समस्या यह है कि हम अक्सर आभासी भावना से प्रभावित होकर उन परिस्थियों को वास्तविक रिश्तों में खोजने और बदलने की कोशिश करते हैं. पर जब हम फेल हो जाते हैं तो हम खुद को मायूस या खुद में अकेलापन महसूस करते है. यही कारण है कि आभासी दुनिया के रिश्ते हमारे दिमाग को बहुत ज्यादा नुकसान पहुचने का काम करती हैं.

     

    किये गए शोध साबित करते हैं कि वास्तविक सामाजिक संबंधों की कमी हमारी संकीर्ण मानसिकता का द्योतक है जो हमारी दुरभावनात्मक प्रतिक्रियाओं को सबसे ज्यादा उकसा सकती है। जो शरीरिक और मानसिक दोनों स्तर पर सबसे बड़ी क्षति है. 

     

    परस्पर संपर्क हमारे दिमाग के स्वास्थ्य को बना अथवा बिगाड़ सकता है, लेकिन आभासी दुनिया में बनाए गए संपर्क (रिश्ते) व बातचीत पूरी तरह से नाटकीय होती है, जहां नए रिश्ते अभिनय की परिकल्पना से प्रभावित दिखाई देते हैं. 

     

    समाधान क्या करें-

    सबसे पहले हमें आभासी रिश्ते या संबंध स्थापित करने वाले उपक्रमों (एप्पस) का उपयोग सीमित करना होगा, उसके बाद दिन-प्रतिदिन वास्तविक जीवन के पहलुओं को समझने के वास्तविक संबंधों की नीव बनाने की कोशिश करना है. 

     

    जब आप किसी से परस्पर वास्तविक सामाजिक संबंध बनाने की कोशिश करते हैं तो हो सकता है शुरुआती स्तर पर थोड़ी कठिनायों का सामना करना पड़े,

     

    लेकिन इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि जब हम संघर्ष करते हैं तो हमारे अन्दर नई-नई योग्यताओं का विकास होता है और बदले में ढेर सारा अनुभव भी प्राप्त होता है, कुल मिलाकर आपका मूल व्यक्तित्व में निखार आता है जिससे आपकी सफल होने की सम्भावना उच्च हो जाती है.

     

    और वैसे भी कंप्यूटर पर समय गुजारने से बेहतर है कि आप अपने वास्तविक रिश्तों (प्रियजनों) के साथ समय करना, जो शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक विकास के लिए सबसे सही विकल्प है और इससे आपकी दिमागी शक्ति भी उन्नत होती है.

     

    मिशिगन विश्वविद्यालय द्वारा 2007 के एक अध्ययन में पाया गया कि प्रतिदिन 10 मिनट तक आमने-सामने की गई बातचीत हमारी स्मृति और चीजों की समझने की क्षमता में भी बहुत सुधार ला सकती है.

     

    पर्याप्त नींद की कमी-

    हम सभी जानते हैं कि एक खराब रात की नींद फोकस की कमी की ओर ले जाती है, हमारे ध्यान, एकाग्रता को भीषण नुकसान पहुंचाती है, और हमारे मूड को नकारात्मक रूप से अत्यधिक प्रभावित करती है.

     

    नींद हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, हममें से कई अक्सर पर्याप्त नींद की कमी को अनदेखा करते है. हमारे द्वारा ली गई पर्याप्त नीद हमारे दिमाग को रिलेक्स और संतुलित करती है. आज की दौड़ती जीवनशैली में, बहुत से लोग काम करने के लिए अपनी पर्याप्त नींद में कटौती करने की कोशिश करते हैं।

     

    पर्याप्त नींद की कमी के परिणाम वास्तव में हमारे लिए सबसे घातक परिणामों में से एक हैं क्योंकि नींद की कमी हमारे दिमाग को सबसे उच्च दर्जे का नुकसान पहुचाने में सक्षम है, 

     

    नींद की कमी के कारण ध्यान और एकाग्रता में कमी, सीखने में बाधा, याददाश्त का खराब होना और मनोभ्रंश (हेलोसिनेशन) व अल्जाइमर जैसे विकार उत्पन्न होने की सम्भावना सबसे अधिक होती है. जो किसी भी जीवन को बर्बाद करने के लिए काफ़ी होता है.

     

    नींद पर किये गए शोध से यह भी पता चलता है कि नींद की कमी हमारे दिमाग को सिकोड़ सकती है. जब आप सोते हैं, तो हमारे दिमाग को, दिन भर आपने जो सीखा या अनुभव किया, उसे ठीक करने और सुव्यवस्थित करने का मौका मिलता है।

     

    तो अब यहाँ पर मैं एक सवाल आपसे पूछता हूँ कि पिछली बार आप कब अच्छी तरह से नहीं सोए थे, लेकिन बहुत अच्छा महसूस किया और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया? मुझे अनुमान लगाने दो- शायद ऐसा कभी नहीं हुआ या अगर आपके साथ ऐसा हुआ है तो कृपया comment box में अपनी राय जरूर दें.

     

    समाधान-

    अधिकांश लोगों को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने और रिलेक्स महसूस करने के लिए कम से कम 07 से 08 घंटे की नींद लेने की आवश्यकता होती है. हालाँकि, यहां नींद की गुणवत्ता का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है. उच्च गुणवत्ता वाली नींद लेने का एक तरीका है सोने के समय से 01 घंटे पूर्व ही बिस्तर पर जाना.

     

    अब यहां पर कुछ के प्रश्न हो सकते हैं कि उन्हें बिस्तर पर 01 घंटा लेटने के बाद भी नींद नहीं आती है? तो इसका साधारण समाधान है कि आप अपने शरीर को इस स्थिति तक थका दें कि बिस्तर पर लेटते ही नींद आ जाए, यदि आपको इस उपाए को करने में समस्या आ रही है तो आप कुछ दिनों के लिए अपने भोजन की मात्रा में लगभग 5 से 10% तक वृद्धि कर दें,

     

    अधिक मात्रा में भोजन लिए जाने के कारण आपका शरीर जल्द ही थक जाता है परिणाम स्वरूप जब बिस्तर पर सोने के लिए लेटते हैं तो आपको जल्द ही गहरी नींद आ जाती है. और हो सकता है कि आपको अच्छे सपने भी आएं.

     

    एक बार जब आपके शरीर को निर्धारित समय पर नींद की आदत पड़ जाती है तो सबसे पहले आप अपने भोजन को संतुलित कर लें, पर्याप्त ली गई नींद आपके आकर्षण को भी बढ़ाने का काम करती है.

     

    क्योंकि लम्बे समय के लिए पर्याप्त मात्रा से अधिक मात्रा में लिए जाने वाले भोजन से मोटापा जैसे विकार उत्पन्न हो सकते हैं. जो आपके शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुचाने के साथ आपके दिमाग को भी नुकसान पहुंचा सकता है.

     

    अंत में-

    हमें अपने दिमाग की नकारात्मक उत्तेजनाओं और हानिकारक गतिविधियों का शिकार बनने के बजाय, दैनिक स्तर पर हमें अपने दिमाग को शांत करने और नए अनुभवों को प्राप्त करने के नए अवसरों के रूप में देखना चाहिए.

     

    ख़ुशी की बात यह है दिमाग को नुकसान पहुचाने वाली अधिकांश आदते दीर्घकालिक नहीं हो सकती, यदि आप उन आदतों के नकारात्मक प्रभावों को पहचान कर उनका जल्द ही शमन कर लें. क्योंकि दिमाग को नुकसान पहुचाने वाली अधिकांश आदतों से बचना आसान है, और सभी के द्वारा इसे आसानी से किया जा सकता है.

     

    आशा है आपको यह लेख "आदतें जो दिमाग को नुकसान पहुंचाती हैं" से कुछ नया जरूर सीखने को मिला होगा. लेख में उल्लिखित आदतों के अलावा एक-दो आदते और भी है जिसका उल्लेख इसी पोस्ट में भविष्य में किया जायेगा. 

     

     

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